डिजिटल डेस्क- स्कूली शिक्षा और पाठ्यक्रम में एक बड़ा सुधार करते हुए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने देश के इतिहास के सबसे विवादित दौर ‘आपातकाल’ (इमरजेंसी) को विषय के रूप में शामिल करने का फैसला किया है। इस कदम का स्वागत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहद जरूरी और ऐतिहासिक सबक बताया है। सरकार का मानना है कि देश के युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों की अहमियत समझाने के लिए इतिहास के इस काले अध्याय को गहराई से जानना और समझना बेहद आवश्यक है।
आने वाली पीढ़ियों को लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ाएगा नया सिलेबस
शिक्षा मंत्रालय और राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह सिखाना है कि किस तरह 1975 में देश के लोकतंत्र और संविधान की आत्मा पर चोट की गई थी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के दौरान हुए नागरिक अधिकारों के हनन, सेंसरशिप और तानाशाही जैसी स्थितियों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। जब बच्चे इस ऐतिहासिक सच्चाई को समझेंगे, तभी वे जागरूक नागरिक बनेंगे और भविष्य में देश के भीतर दोबारा कभी ऐसी दमनकारी स्थिति पैदा नहीं होने देंगे।
NCERT के फैसले की चौतरफा सराहना, लोकतंत्र को मिलेगी मजबूती
इस ऐतिहासिक निर्णय को लेकर शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों की ओर से NCERT की सराहना की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतिहास को बिना किसी लाग-लपेट के सामने रखना ही सच्ची शिक्षा है। 25 जून 1975 को लगाए गए 21 महीनों के आपातकाल की कड़वी यादों को सिलेबस का हिस्सा बनाकर NCERT ने एक सराहनीय काम किया है। यह नया पाठ्यक्रम छात्रों को न केवल देश के राजनीतिक उतार-चढ़ाव से रूबरू कराएगा, बल्कि भारतीय संविधान के प्रति उनके सम्मान और रक्षा के संकल्प को भी और अधिक मजबूत करेगा।