डिजिटल डेस्क- तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को मानहानि के एक मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर एक बार फिर रोक लगा दी है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ (सिंगल बेंच) ने अभिषेक बनर्जी की उस याचिका को बहाल कर दिया है, जिसे पिछले दिनों वकीलों की अनुपस्थिति के कारण खारिज कर दिया गया था। कोर्ट के इस फैसले से टीएमसी सांसद को कानूनी मोर्चे पर फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है।
वकीलों के न पहुंचने पर हट गई थी रोक, कोर्ट ने दोबारा बहाल की याचिका
दरअसल, इस मामले में गत 17 जून 2026 को सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के वकीलों के गैर-हाजिर रहने की वजह से हाई कोर्ट ने उनकी मुख्य याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका खारिज होने के साथ ही निचली अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक भी स्वतः हट गई थी। इसके बाद बनर्जी की ओर से अदालत में दोबारा अर्जी दाखिल कर याचिका को बहाल करने की गुहार लगाई गई, जिसे स्वीकार करते हुए जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की बेंच ने राहत बरकरार रखने का आदेश सुनाया।
आकाश विजयवर्गीय ने दर्ज कराया था मानहानि का मुकदमा, एमपी-एमएलए कोर्ट ने जारी किया था वारंट
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुई एक चुनावी जनसभा से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उस रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को सरेआम ‘गुंडा’ कहा था। इस बयान के खिलाफ आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसी मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने सुनवाई करते हुए टीएमसी सांसद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिस पर अब हाई कोर्ट ने दोबारा रोक लगा दी है।