Gold Silver Rates Crash: 7 महीने के निचले स्तर पर सोना, डॉलर की मजबूती और फेड की सख्ती से बढ़ी गिरावट

KNEWS DESK- एमसीएक्स पर गोल्ड और सिल्वर में भारी गिरावट, निवेशकों के लिए सतर्क रहने की सलाह, जानिए क्या है गिरावट की बड़ी वजहें

भारतीय वायदा बाजार में 24 जून को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 1.21 प्रतिशत गिरकर करीब ₹1,44,759 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी (Silver Futures) में भी 0.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के साथ सोना सात महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।

डॉलर की मजबूती से दबाव में सोना

सोने की कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना बताया जा रहा है। डॉलर इंडेक्स एक साल के उच्च स्तर 101.52 पर पहुंच गया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर सोना अन्य मुद्राओं में महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर असर पड़ता है।

फेड की सख्त नीति की उम्मीद बनी वजह

बाजार में इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त नीति की उम्मीदें बढ़ गई हैं। निवेशकों को आशंका है कि फेड आगे भी ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है या बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे सोने में निवेश कम आकर्षक हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फेड के कड़े रुख और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है।

टेक शेयरों की गिरावट का भी असर

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट के चलते निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में नुकसान की भरपाई के लिए सोने की बिकवाली बढ़ा दी है। इससे भी सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला है।

कहां मिल रहा सपोर्ट और रेजिस्टेंस?

विशेषज्ञों के अनुसार MCX पर गोल्ड के लिए अहम सपोर्ट स्तर ₹1,45,200 और ₹1,44,000 बताए जा रहे हैं, जबकि रेजिस्टेंस ₹1,47,200 और ₹1,48,100 पर है।

चांदी के लिए सपोर्ट ₹2,21,000 और ₹2,16,600 पर है, जबकि रेजिस्टेंस ₹2,28,800 और ₹2,31,200 पर देखने को मिल रहा है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सोना ₹1,51,000–₹1,53,000 के रेजिस्टेंस जोन को पार नहीं करता, तब तक इसमें दबाव बना रह सकता है। अगर कीमतें ₹1,45,500 से नीचे जाती हैं, तो गिरावट और तेज होकर ₹1,40,000 तक पहुंच सकती है।

आगे बाजार की नजर कहां?

अब बाजार की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति पर टिकी है। आने वाले PCE (Personal Consumption Expenditure) डेटा से यह संकेत मिलेगा कि फेड अपनी ब्याज दर नीति को किस दिशा में ले जाएगा।


डॉलर की मजबूती और फेड की सख्त नीति की उम्मीदों के चलते सोने-चांदी पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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