लखनऊ अग्निकांड में 4 अधिकारी सस्पेंड , 2016 में LDA ने बिल्डिंग को गिराने का दिया था आदेश

Knews Desk- लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर शहर की बिल्डिंग सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब इमारत से जुड़ी पुरानी फाइलें और अनदेखी भी सामने आ रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जिस इमारत में आग लगी, उसे लेकर वर्ष 2016 में ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उसे गिराने का आदेश जारी किया था। हालांकि बाद में यह नोटिस रद्द कर दिया गया था। अब हादसे के बाद एलडीए ने एक बार फिर कार्रवाई करते हुए इमारत पर नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए पास कराया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इमारत में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और अन्य व्यावसायिक इकाइयां संचालित हो रही थीं। इसके अलावा, आवासीय भवन में कमर्शियल बिजली कनेक्शन भी लिया गया था, जिससे नियमों के उल्लंघन की आशंका और मजबूत हो गई है।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि भवन में बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। इमरजेंसी एग्जिट की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी और आग लगने के बाद धुआं तेजी से फैल गया। राहत और बचाव दल को कई जगह दीवार तोड़कर लोगों को बाहर निकालना पड़ा। वहीं, छत पर जाने वाली सीढ़ी भी बंद पाई गई, जिससे कई छात्र ऊपर की ओर भागकर अपनी जान नहीं बचा सके। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि हादसे के दौरान फायर ब्रिगेड की टीम देर से पहुंची, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि शहर की कई खतरनाक इमारतों को सिर्फ नोटिस देकर औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

प्रशासनिक स्तर पर अब सख्त कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद बिजली विभाग के एक्सईएन, एलडीए के जेई और एई सहित चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा फायर सर्विस स्टेशन ऑफिसर (FSSO) इंदिरा नगर को भी सस्पेंड किया गया है। हादसे की जांच के लिए दो सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हैं। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच, इमारत की सुरक्षा और निर्माण मानकों की अनदेखी को लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने क्षेत्र की अन्य इमारतों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।

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