डिजिटल डेस्क- देश में हाई-प्रोफाइल लोगों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। अब एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल साइबर ठगों का शिकार हो गए हैं। शातिर स्कैमर्स ने नरेश गुजराल का फर्जी डिजिटल प्रोफाइल बनाकर उनके वित्तीय कर्मचारियों को झांसे में लिया और कंपनी के खाते से ₹7.8 करोड़ ट्रांसफर करवा लिए। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस ठगी की रकम का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अलग-अलग बैंक खातों में फ्रीज करवाकर वापस पा लिया है।
मैलवेयर और हैकिंग के जरिए बिछाया गया जाल
जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण फ्रॉड नहीं, बल्कि बेहद शातिर तरीके से प्लान किया गया साइबर हमला था। ठगों ने सबसे पहले कंपनी के एक कर्मचारी को एक मैलिशियस (संक्रमित) फाइल भेजकर उसका मोबाइल फोन हैक कर लिया। फोन का एक्सेस मिलते ही हैकर्स ने कर्मचारी की कॉन्टैक्ट लिस्ट में चालाकी से बदलाव किया। उन्होंने नरेश गुजराल के असली नंबर को अपने फर्जी नंबर से बदल दिया, लेकिन नाम और डिस्प्ले पिक्चर नरेश गुजराल की ही रहने दी। इसके बाद ठगों ने ‘आपातकालीन बिजनेस डील’ का बहाना बनाकर कर्मचारी को मैसेज भेजे, जिससे कर्मचारी को लगा कि मैसेज खुद उसके बॉस भेज रहे हैं।
CFO भी खा गए धोखा, चार दिन में हुआ बड़ा ट्रांजैक्शन
यह पूरी वारदात 12 जून से 16 जून के बीच अंजाम दी गई। बॉस का आदेश समझकर कर्मचारी ने बिना किसी शक के आरटीजीएस (RTGS) के जरिए ट्रांजैक्शन शुरू कर दिए। इस दौरान जब बैंक ने इतने बड़े ट्रांसफर को लेकर असामान्य चेतावनी जारी की और कंपनी के सीएफओ से मंजूरी मांगी, तो CFO ने भी इसे नियमित बिजनेस अप्रूवल समझकर हरी झंडी दे दी। चार दिनों के भीतर चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन में ₹7.8 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर हो गए। इस महाघोटाले का खुलासा 16 जून को तब हुआ जब कंपनी के एक अधिकारी को शक हुआ और उसने पेमेंट की पुष्टि के लिए नरेश गुजराल की बेटी से संपर्क किया। जब बेटी ने अपने पिता से बात की, तो पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश दिया ही नहीं था। इसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया और तुरंत दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज कराई गई।
पीड़ित नरेश गुजराल ने की पुलिस की तारीफ
उद्योगपति और पूर्व सांसद नरेश गुजराल ने मीडिया को बताया कि उनकी गैर-मौजूदगी में उनके सीएफओ दुर्भाग्य से इस धोखाधड़ी का शिकार हो गए। उन्होंने आगे कहा कि वह दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम टीम की तारीफ करते हैं क्योंकि उन्होंने बेहद तेजी से कार्रवाई की और लगभग 70% रकम वापस पा ली है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाकी बची हुई रकम भी वापस मिल जाएगी।