जौनपुरः 30 बदमाशों का एनकाउंटर करने वाले जांबाज दरोगा के अपने ही विभाग के आगे हुआ बेबस, अपने ही घर की चोरी की एफआईआर के लिए खा रहे ठोकरें

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से खाकी को कटघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस पुलिस महकमे के दम पर सूबे में अपराधियों पर नकेल कसने और ‘रामराज्य’ का दावा किया जाता है, उसी महकमे के एक जांबाज रिटायर्ड दरोगा आज अपने ही घर में हुई लाखों की चोरी की एफआईआर दर्ज कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। कभी जौनपुर की एसओजी टीम में रहकर 30 से अधिक खूंखार अपराधियों का एनकाउंटर करने वाले रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर रामलखन यादव आज खुद सिस्टम के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस पीड़ित परिवार पर लगातार तहरीर बदलने और चोरी गए जेवरातों का पक्का बिल दिखाने का दबाव बना रही है।

ताला तोड़कर उड़ा ले गए लाखों के जेवरात और नकदी

जानकारी के अनुसार, साल 2017 में सेवानिवृत्त होने के बाद रामलखन यादव ने जौनपुर के नगर कोतवाली क्षेत्र में एक मकान खरीदा था, जहां उनका बेटा विजय प्रताप यादव और बहू रहते हैं। 11 जून की रात जब पूरा परिवार गांव गया हुआ था और मकान में ताला बंद था, तभी चोरों ने धाबा बोलकर लाखों के सोने-चांदी के जेवरात और 20 हजार रुपये की नकदी पार कर दी। पड़ोसियों की सूचना पर जब पीड़ित परिवार मौके पर पहुंचा, तो घर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत नगर कोतवाली पुलिस को लिखित तहरीर देकर मामले की शिकायत की।

“जेवरात चोरी मत लिखिए, स्टांप पेपर पर सबूत दीजिए”

पीड़ा तब और बढ़ गई जब एफआईआर की कॉपी लेने पहुंचे दरोगा के बेटे विजय प्रताप से कोतवाली के एक पुलिसकर्मी ने संवेदनहीन लहजे में कहा कि तहरीर में से ‘जेवरात चोरी’ होने की बात हटा दीजिए। पुलिस ने पीड़ित से सवाल किया कि जेवरात चोरी हुए हैं, इसका क्या प्रमाण है? इसके लिए स्टांप पेपर पर लिखकर दीजिए, मुख्य तहरीर में इसका जिक्र मत करिए। रिटायर्ड दरोगा और उनके बेटे ने रोष जताते हुए कहा कि शादी-विवाह में मिले उपहारों और ‘स्त्रीधन’ का साक्ष्य (बिल) कोई कहां से लाकर दे? क्या कोई अपनी ही बहू के गहनों का बिल संभालकर रखता है? जब विभाग अपने ही पूर्व अधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव कर रहा है, तो आम जनता के साथ क्या होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

एसपी दफ्तर से भी मिली निराशा, एएसपी ने दी सफाई

कोतवाली पुलिस के इस रवैये से परेशान होकर जब रिटायर्ड दरोगा जौनपुर के एसपी कुंवर अनुपम सिंह से मिलने पहुंचे, तो वहां भी निराशा हाथ लगी। एसपी की अनुपस्थिति में सुनवाई कर रही एएसपी/सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने भी कथित तौर पर पीड़ित को तहरीर बदलकर देने की बात कह दी।

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