डिजिटल डेस्क- कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां बेल्थंगडी तालुक सरकारी अस्पताल के दवा भंडारण विभाग (ड्रग वेयरहाउस) के प्रमुख चंद्रशेखर पर वहीं काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। अधिकारी की लगातार बढ़ती प्रताड़ना और अश्लील हरकतों से तंग आकर पीड़िता ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया। महिला ने न सिर्फ आरोपी अधिकारी के चेहरे पर अपना इस्तीफा पत्र दे मारा, बल्कि सीधे पुलिस थाने पहुंचकर उसके खिलाफ मामला भी दर्ज करा दिया है।
नौकरी से बर्खास्त करने की देता था धमकी
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला कर्मचारी इस सरकारी अस्पताल में अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर अपनी सेवाएं दे रही थी। आरोप है कि विभाग का मुख्य अधिकारी चंद्रशेखर लंबे समय से उस पर बुरी नजर रखे हुए था और उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न कर रहा था। महिला जब भी उसकी इन घिनौनी हरकतों का विरोध करती, तो आरोपी अधिकारी अपनी प्रशासनिक ताकत का धौंस दिखाता था। वह पीड़िता को धमकी देता था कि अगर उसने इस बात का जिक्र किसी से भी किया या मुंह खोला, तो वह उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर घर बैठा देगा। आखिरकार, आत्मसम्मान की खातिर महिला ने इस रोज-रोज के टॉर्चर को सहने के बजाय नौकरी छोड़ने और आरोपी को बेनकाब करने का फैसला किया।
एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी अधिकारी फरार
पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्थंगडी पुलिस स्टेशन में आरोपी चंद्रशेखर के खिलाफ यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी देने की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। जैसे ही पुलिस ने इस मामले में कानूनी शिकंजा कसना शुरू किया, आरोपी चंद्रशेखर गिरफ्तारी के डर से अपने ठिकानों से फरार हो गया। पुलिस की कई टीमें उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
25 साल से एक ही जगह जमा था आरोपी, दवाइयों के महाघोटाले का भंडाफोड़
इस यौन उत्पीड़न मामले के सामने आने के बाद आरोपी अधिकारी चंद्रशेखर के कई और काले कारनामे एक-एक कर उजागर होने लगे हैं। बताया जा रहा है कि वह ऊंचे राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख के दम पर पिछले 25 वर्षों से जुगाड़ लगाकर इसी अस्पताल में अपनी कुर्सी पर जमा हुआ था। स्थानीय सूत्रों और जांच के मुताबिक, चंद्रशेखर पर अस्पताल में आने वाली महंगी और जीवनरक्षक सरकारी दवाइयों के गबन का भी आरोप है। वह उन दवाइयों को, जिन पर किसी कारणवश सरकारी सील नहीं होती थी, चोरी-छिपे अपने और करीबियों के नाम से चल रहे 4-5 निजी मेडिकल स्टोर्स पर ऊंचे दामों में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा था। स्थानीय दावों के अनुसार, चंद्रशेखर का आतंक सिर्फ कांट्रैक्ट कर्मचारियों तक सीमित नहीं था। वह अस्पताल में इंटर्नशिप के लिए आने वाली मेडिकल छात्राओं को भी उनके अनिवार्य सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करने के बहाने केबिन में बुलाकर मानसिक रूप से परेशान करता था।”