होर्मुज संकट में किसने कमाए सबसे ज्यादा पैसे? तेल मार्ग बंद होने से इन देशों की चमकी किस्मत

KNEWS DESK- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा लाइफलाइन माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। लेकिन जब इस मार्ग पर संकट आया, तो कई देशों के सामने ऊर्जा और आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गईं। वहीं कुछ देशों ने इस स्थिति को अवसर में बदलते हुए भारी आर्थिक लाभ कमाया।

सबसे बड़ा फायदा रूस को हुआ। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण रूस की तेल और गैस से होने वाली आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। ऊंचे दामों पर तेल बेचने से रूसी ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिला और सरकारी राजस्व में भी इजाफा हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने से रूसी तेल की मांग बढ़ी, जिसका सीधा असर उसकी कमाई पर पड़ा।

अमेरिका भी इस संकट का प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरा। तेल की कीमतें बढ़ने से अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को बेहतर मुनाफा मिला। उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं को भी गति मिली और अमेरिकी कच्चे तेल की मांग में वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों ने अमेरिकी ऊर्जा उद्योग को नई मजबूती दी।

सऊदी अरब ने भी अपनी रणनीतिक तैयारियों का फायदा उठाया। होर्मुज मार्ग पर निर्भर रहने के बजाय उसने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात को लाल सागर के मार्ग पर स्थानांतरित कर दिया। इससे उसका निर्यात प्रभावित नहीं हुआ और बढ़ती कीमतों का लाभ भी उसे मिला। सऊदी ऊर्जा क्षेत्र ने इस दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया।

इराक ने भी संकट के बीच वैकल्पिक रास्तों पर जोर दिया। तुर्की तक जाने वाली पाइपलाइन को फिर से सक्रिय किया गया, जिससे तेल निर्यात के नए विकल्प खुले। साथ ही अन्य क्षेत्रीय देशों तक नई पाइपलाइन परियोजनाओं पर भी काम तेज हुआ।

ओमान को भौगोलिक स्थिति का लाभ मिला। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर स्थित होने के कारण उसका निर्यात अपेक्षाकृत सुरक्षित रहा। वैश्विक बाजार में बढ़ी कीमतों ने उसकी आय को भी बढ़ावा दिया।

यूरोप में नॉर्वे सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल रहा। पहले से ही प्रमुख तेल और गैस निर्यातक होने के कारण नॉर्वे ने ऊंची ऊर्जा कीमतों का भरपूर फायदा उठाया और उसके निर्यात राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कुल मिलाकर, जहां होर्मुज संकट ने कई देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती पैदा की, वहीं रूस, अमेरिका, सऊदी अरब, ओमान, इराक और नॉर्वे जैसे देशों ने वैकल्पिक मार्गों, बढ़ी कीमतों और रणनीतिक तैयारियों के दम पर इस संकट को आर्थिक अवसर में बदल दिया।

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