Knews Desk- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून के बीच फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव फ्रांस होगा, जहां पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर चर्चा करेंगे। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
फ्रांस भारत के सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में से एक माना जाता है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में राफेल लड़ाकू विमान, पनडुब्बी तकनीक और रक्षा उत्पादन जैसे कई अहम समझौते पहले ही हो चुके हैं। हालिया बैठकों में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार भारत इस सम्मेलन में प्रमुख भागीदार देशों में शामिल होगा और कई महत्वपूर्ण बैठकों में अपनी भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और फ्रांस के रिश्तों को और मजबूती देगा। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, रक्षा उत्पादन में साझेदारी और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसरों पर भी चर्चा हो सकती है।
पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत और फ्रांस की बढ़ती नजदीकियां दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।