उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो गई है. चुनावी साल को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों सहित अन्य दलों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं. एक ओर कांग्रेस सरकार की कमियों को जनता तक पहुंचाने और अपने कार्यकाल के काम गिनाकर मिशन 2027 साधने में जुटी है.वहीं सत्ताधारी भाजपा चुनावी मोड में आ गई है, जिसके चलते पार्टी ने पिछले चुनावों में हारी सीटों पर फोकस बढ़ा दिया है.अब भाजपा उन सभी क्षेत्रों में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की रणनीति पर कार्य करने जा रही है.आपको बता दे,भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के हालिया प्रदेश दौरे के बाद कार्यक्रमों का असर चुनावी रणभूमि में दिखने लगा है.बीते कुछ दिनों पहले दिल्ली में हुई भाजपा की अहम बैठक में चुनावी रणनीति पर मुहर लगी,बैठक में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी मौजूद रहे और तय किया गया कि हर सांसद, मंत्री और विधायक को एक-एक विधानसभा में 24 घंटे प्रवास करना होगा. 17 सदस्यों की कोर कमेटी बना भाजपा द्वारा अब हारी हुई 23 सीटों की कमान कमेटी को सौंपी गई है. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर सांसद शामिल हैं और कुछ सांसदों को 2-3 सीटों की जिम्मेदारी मिली है. भाजपा इसे चुनाव के लिए अहम कदम बता रही है,जबकि विपक्ष इसे जनता के बीच दिखावा बता रहा है.जिसके चलते इस मुद्दे पर विपक्षी दलों सहित सत्ताधारी पार्टी के बीच आपसी बयानबाजी तेज हो गई है.
उत्तराखंड में 2027 के चुनावी रण की बिसात बिछ चुकी है, भाजपा ने चुनावी मोड में आते हुए बड़ा दाव खेलने जा रही है. बीते दिनों दिल्ली में हुई हाई लेवल बैठक में तय हुआ कि प्रदेश के हर सांसद, मंत्री और विधायक को एक-एक विधानसभा में पूरे 24 घंटे का प्रवास करना होगा. इतना ही नहीं पार्टी ने कोर कमेटी के 17 दिग्गजों को पिछली बार हारी हुई, विधानसभा सीटों की सीधी कमान सौंप दी है. इस लिस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर मौजूदा सांसद तक शामिल हैं, साथ ही कुछ सांसदों को तो दो-दो, तीन-तीन सीटों की जिम्मेदारी दी गई है. भाजपा का दावा है कि इससे बूथ स्तर पर संगठन मजबूत होगा. दूसरी तरफ कांग्रेस इसे चुनावी दिखावा बता रही है. कांग्रेस का कहना है कि भाजपा के शासन में महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक से जनता त्रस्त है. वही कांग्रेस सरकार की नाकामियों को जनता के बीच ले जाकर अपने कार्यकाल के काम गिना रही है.
उत्तराखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है. भले ही 2027 अभी दूर है लेकिन राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है. सत्ता पक्ष भाजपा ने चुनावी चक्रव्यूह रच दिया है,फॉर्मूला है 24 घंटे का प्रवास. जिसके चलते हर सांसद, और मंत्री, सहित विधायक एक दिन का समय अपनी अपनी विधानसभा में गुजारेंगे. भाजपा के निशाने पर हैं वो सीटें जहां पिछली बार कमल नहीं खिल पाया था.जिसके लिए इन सीटों को फतह करने के लिए उतारे गए पार्टी के बड़े नेता, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर सांसद तक को मिली है. हार को जीत में बदलने की जिम्मेदारी. वही भाजपा इसे जमीनी मजबूती का मंत्र बता रही है, लेकिन कांग्रेस इस विषय को भाजपा सरकार की नाकामी छुपाने का दिखावा करार कर रही है.देखने वाली बात यह होगी कि क्या वाकई 24 घंटे का प्रवास अब हारी हुई सीटों पर वाक्य ही भाजपा की नैया पार लगाएगा और बची हुई कुछ सीटों पर भाजपा किस प्रकार बाजी पलट पायेगी यह भी आने वाला समय ही तय कर पाएगा.