78 साल बाद जीवन से दूर हुआ अंधेरा… बिहार के नक्सल प्रभावित गांव में जब पहली बार चमका बल्ब, तो खुशी से रो पड़ा गरीब परिवार

शिव शंकर सविता- कहते हैं रोशनी की कीमत वही समझ सकता है जिसने सदियों तक अंधेरे का दंश झेला हो। देश की आजादी के 78 साल बाद बिहार के औरंगाबाद जिले से एक ऐसी भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके की आंखों को नम कर दिया। जिले के धुर नक्सल प्रभावित देव प्रखंड के कुंडा गांव (हसौली पंचायत) में जब एक गरीब परिवार के आशियाने में पहली बार बिजली का बल्ब टिमटिमाकर जला, तो सालों का स्याह अंधेरा पल भर में गायब हो गया। इस ऐतिहासिक और भावुक पल को देखकर परिवार के बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

लोहड़ी पाल के घर फैली खुशियों की रोशनी

यह मार्मिक दृश्य कुंडा गांव के रहने वाले बुजुर्ग लोहड़ी पाल के घर का है। गांव के अन्य हिस्सों में भले ही बिजली की तारें पहले पहुंच गई थीं, लेकिन आर्थिक तंगी, घोर मुफ़लिसी और अशिक्षा के कारण लोहड़ी पाल का परिवार इस बुनियादी सुविधा से कोसों दूर था। पूरा परिवार पीढ़ियों से ढिबरी (मिट्टी के तेल का दीया) और मोमबत्ती के सहारे रातें काटने को मजबूर था। जब बुधवार को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उनके घर का स्विच ऑन किया और पूरा घर दूधिया रोशनी से नहा उठा, तो मानो इस परिवार के लिए साक्षात भगवान जमीन पर उतर आए। बुजुर्ग लोहड़ी पाल और उनके परिजनों ने सबसे पहले हाथ जोड़कर भगवान का धन्यवाद किया और रोते हुए घर के मंदिर में पूजा-अर्चना की। उनकी आंखों से बहते आंसू उस बेबसी और आज मिली असीम खुशी की गवाही दे रहे थे।

अशिक्षा और मुफ़लिसी बनी थी दीवार

लोहड़ी पाल ने जीवन भर मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाला है। अब उम्र के इस पड़ाव पर जब शरीर ने साथ छोड़ना शुरू किया, तो उन्होंने दो वक्त की रोटी के लिए बकरी पालन शुरू कर दिया। बेहद सीमित आय में परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही उनके लिए रोज़ की एक जंग थी। अशिक्षा के कारण इस परिवार को यह मालूम ही नहीं था कि सरकारी दफ्तरों में बिजली कनेक्शन के लिए कैसे आवेदन किया जाता है। बिजली का कनेक्शन लेना इनके लिए किसी बड़े और महंगे सपने जैसा था, जिसे वे अपनी गरीबी के आगे कभी पूरा नहीं कर पा रहे थे।

२५ दिनों के इंतजार के बाद मिटा ७८ वर्षों का दर्द

इस बार कुछ जागरूक लोगों की मदद से परिवार ने हिम्मत जुटाई और बिजली विभाग में विधिवत आवेदन दिया। आवेदन करने के बाद दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं और परिवार बीते 25 दिनों से हर सुबह टकटकी लगाए रास्ते को निहारता था कि कब उनके घर बिजली आएगी। आखिरकार, विभाग की टीम कुंडा गांव पहुंची, घर की दीवार पर बिजली का मीटर लगाया गया और जैसे ही कनेक्शन चालू हुआ, दशकों पुराना इंतजार खत्म हो गया। आज लोहड़ी पाल के घर का हर कोना रोशन है और गांव का हर नागरिक इस भावुक क्षण का गवाह बनकर बेहद खुश है। आजादी के इतने सालों बाद ही सही, लेकिन इस गरीब के घर आई रोशनी ने यह साबित कर दिया कि विकास की किरणें देर से ही सही, पर आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचती जरूर हैं।

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