डिजिटल डेस्क- खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण युद्ध और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कुवैत सरकार ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। ईरान की ओर से लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को देखते हुए कुवैत ने आज सुबह 4:50 बजे से अपने पूरे हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद से पूरे क्षेत्र में विमानन सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं।
DGCA ने की पुष्टि
कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस आपातकालीन फैसले की पुष्टि करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। DGCA के अनुसार, यह कदम नागरिक उड्डयन और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हवाई क्षेत्र बंद होने के तुरंत बाद कुवैत आने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को रोक दिया गया है। विमानों का मार्ग हवा में ही बदल दिया गया है और उन्हें सुरक्षित पड़ोसी देशों के वैकल्पिक हवाई अड्डों (Alternative Airports) की ओर भेजा जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए अभी तक वैकल्पिक हवाई अड्डों के नामों और प्रभावित उड़ानों की सटीक संख्या की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
वायु सेना अलर्ट पर, आसमान में चक्कर काटते रहे विमान
यह आपातकालीन घोषणा ठीक उस समय की गई, जब कुवैती सेना ने बयान जारी कर बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियां पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं और संभावित खतरों के खिलाफ जवाबी गोलीबारी कर रही हैं। इस आधिकारिक घोषणा से पहले, आसमान में बेहद तनावपूर्ण स्थिति देखी गई। कुवैत के हवाई क्षेत्र के अचानक बंद होने के कारण कई वाणिज्यिक विमानों को हवा में ही होल्डिंग पैटर्न पर डाल दिया गया, जिससे वे काफी समय तक कुवैती सीमा के बाहर आसमान में चक्कर काटते नजर आए। बाद में एटीसी (Air Traffic Control) के निर्देश पर उन्हें सुरक्षित डाइवर्ट किया गया।
कुवैत ने ईरान के कृत्य को बताया ‘निंदनीय’
कुवैत सरकार ने इस बेहद कड़े फैसले को जायज ठहराते हुए ईरान पर सीधा और कड़ा हमला बोला है। कुवैत प्रशासन ने कहा, “यह कदम कुवैत पर ईरान के निंदनीय हमलों और उनके कारण पूरे क्षेत्र के नागरिक विमानन यातायात उत्पन्न होने वाले आसन्न और गंभीर खतरों को देखते हुए उठाया गया है।” कुवैत ने स्पष्ट किया है कि जब तक आसमान में सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती और मिसाइल-ड्रोन हमलों का खतरा टल नहीं जाता, तब तक हवाई क्षेत्र को बंद रखा जाएगा।