KNEWS DESK – दिवंगत अभिनेता इरफान खान को हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली कलाकारों में गिना जाता है। अपनी दमदार अदाकारी, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई थी। कई कलाकार उनके साथ काम करने से पहले दबाव महसूस करते थे, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब खुद इरफान खान एक बड़े स्टार के साथ स्क्रीन शेयर करने को लेकर असमंजस में पड़ गए थे।
यह किस्सा फिल्म ‘राइट या रॉन्ग’ से जुड़ा है, जो साल 2010 में रिलीज हुई थी। फिल्म के निर्देशक नीरज पाठक ने एक पुराने इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने इस फिल्म के लिए इरफान खान को अप्रोच किया था। हालांकि शुरुआत में अभिनेता ने फिल्म का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था।
नीरज पाठक के मुताबिक, फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका निभाने वाले थे। जब इरफान को इस बारे में पता चला तो वह थोड़े असहज हो गए। उन्हें लगता था कि सनी देओल की बड़ी स्टार इमेज और उनकी लोकप्रियता के बीच उनका किरदार कहीं दब न जाए। इसी वजह से उन्होंने फिल्म करने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई।

निर्देशक ने बताया कि इरफान को यह भी चिंता थी कि फिल्म की कहानी कहीं पूरी तरह सनी देओल के किरदार के इर्द-गिर्द न घूमने लगे। हालांकि नीरज पाठक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सनी देओल एक पेशेवर और आत्मविश्वासी कलाकार हैं, जो कभी किसी दूसरे अभिनेता के किरदार को कमजोर नहीं होने देते।
इसके बावजूद इरफान तुरंत तैयार नहीं हुए। बाद में जब निर्माताओं ने दूसरे अभिनेता को लेने की संभावना पर विचार किया, तब इरफान ने दोबारा फिल्म की स्क्रिप्ट सुनने की इच्छा जताई। कहानी सुनने के बाद उन्हें स्क्रिप्ट बेहद पसंद आई और आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम करने के लिए हामी भर दी।

इसके बाद ‘राइट या रॉन्ग’ में सनी देओल, इरफान खान और के.के. मेनन की तिकड़ी नजर आई। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल न कर पाई हो, लेकिन इसमें कलाकारों की परफॉर्मेंस को काफी सराहा गया था।
यह किस्सा दिखाता है कि अभिनय की दुनिया में बड़े से बड़ा कलाकार भी कभी-कभी अपने किरदार और स्क्रीन स्पेस को लेकर सोच-विचार करता है, लेकिन अंततः अच्छी कहानी ही उसे फैसला बदलने पर मजबूर कर देती है।