KNEWS DESK- बिजली के बढ़ते बिलों से राहत पाने के लिए देशभर में लोग तेजी से सोलर एनर्जी की ओर रुख कर रहे हैं। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने इस अभियान को और गति दी है। योजना के तहत योग्य उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगाने पर आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। हालांकि, आवेदन करने से पहले सही सोलर सिस्टम का चुनाव करना बेहद जरूरी है।

बाजार में मुख्य रूप से ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दो प्रकार के सोलर सिस्टम उपलब्ध हैं। दोनों की कार्यप्रणाली, लागत और फायदे अलग-अलग हैं। गलत विकल्प चुनने पर न सिर्फ अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है, बल्कि सरकारी सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
ऑन-ग्रिड सिस्टम क्यों है लोकप्रिय?
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम सीधे बिजली विभाग के ग्रिड से जुड़ा होता है। दिन में सोलर पैनल से बनने वाली बिजली घर में उपयोग होती है और अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड में चली जाती है। इसके बदले उपभोक्ता को क्रेडिट मिलता है, जिससे बिजली बिल काफी कम या शून्य तक हो सकता है।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे शुरुआती लागत कम रहती है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सब्सिडी भी मुख्य रूप से इसी श्रेणी के सिस्टम पर उपलब्ध है।
ऑफ-ग्रिड सिस्टम किन लोगों के लिए बेहतर?
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करता है और बिजली ग्रिड से नहीं जुड़ा होता। इसमें बिजली स्टोर करने के लिए बैटरियों का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि इसकी लागत अधिक होती है और समय-समय पर बैटरी बदलने का खर्च भी अलग से उठाना पड़ता है।
यह सिस्टम उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना जाता है जहां लंबे समय तक बिजली कटौती होती है या ग्रिड कनेक्शन उपलब्ध नहीं है।
हाइब्रिड सिस्टम भी बन रहा पसंद
हाइब्रिड सिस्टम ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों तकनीकों का मिश्रण है। इसमें ग्रिड कनेक्शन के साथ बैकअप सुविधा भी मिलती है। बिजली जाने पर बैटरी सपोर्ट उपलब्ध रहता है और सामान्य दिनों में नेट मीटरिंग का फायदा भी मिलता है। हालांकि इसकी लागत ऑन-ग्रिड सिस्टम से अधिक हो सकती है।
किस सिस्टम में निवेश करना रहेगा फायदेमंद?
अगर आपके इलाके में बिजली कटौती बहुत कम होती है, तो ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम सबसे किफायती और लाभदायक विकल्प माना जाता है। कम लागत, सरकारी सब्सिडी, न्यूनतम मेंटेनेंस और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन इसकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। वहीं बार-बार बिजली जाने वाले क्षेत्रों में हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड सिस्टम बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
सोलर सिस्टम चुनने से पहले अपनी बिजली जरूरत, बजट और स्थानीय बिजली आपूर्ति की स्थिति का आकलन जरूर करें। सही फैसला आपको आने वाले वर्षों तक बड़ी बचत दिला सकता है।