अधिकमास की वरद चतुर्थी कब है? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

KNEWS DESK- हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन प्रथम पूज्य गणेश को समर्पित होता है। हर महीने दो बार आने वाली चतुर्थी में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। अधिकमास में पड़ने वाली वरद चतुर्थी को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान गणेश भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन के विघ्न दूर करते हैं।

रद चतुर्थी 2026 की तिथि और शुभ समय

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ – 19 मई 2026, दोपहर 02:18 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त – 20 मई 2026, सुबह 11:06 बजे

चंद्र दर्शन से बचने का समय

  • 19 मई – दोपहर 02:18 बजे से रात 10:13 बजे तक
  • 20 मई – सुबह 08:43 बजे से रात 11:08 बजे तक

धार्मिक मान्यता के अनुसार, चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान चंद्रमा देखने से मिथ्या दोष लग सकता है।

वरद चतुर्थी का धार्मिक महत्व

गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। वरद चतुर्थी के दिन व्रत और पूजा करने से बुद्धि, सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। भक्त इस दिन मंदिरों में जाकर गणपति बप्पा के दर्शन करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

ऐसे करें वरद चतुर्थी की पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • घर के मंदिर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • भगवान को स्नान कराकर साफ वस्त्र पहनाएं।
  • फूलों की माला और दूर्वा घास अर्पित करें।
  • मोदक और लड्डू का भोग लगाएं।
  • गणेश मंत्रों का जाप करें और चतुर्थी कथा सुनें।
  • अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें।

गणेश मंत्र

“ॐ गं गणपतये नमः”

“ॐ वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

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