पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा होते ही बढ़े FMCG कंपनियों के खर्च, साबुन-बिस्किट से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे होने के संकेत

KNEWS DESK- पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल-डीजल महंगा होने की वजह से आने वाले महीनों में पैकेटबंद खाने-पीने की चीजें, रोजमर्रा का सामान और घरेलू उत्पाद महंगे हो सकते हैं। बढ़ती ट्रांसपोर्ट और कच्चे माल की लागत ने FMCG कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्यूल की कीमतों में हालिया उछाल का सीधा असर फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियों पर पड़ रहा है। माल ढुलाई, डिस्ट्रीब्यूशन और पैकेजिंग की लागत लगातार बढ़ रही है। कंपनियां पहले से ही 8-10 फीसदी महंगाई के दबाव का सामना कर रही हैं।

GST कटौती के बाद सुधर रही थी डिमांड

पिछले साल GST दरों में कटौती के बाद बाजार में कंज्यूमर डिमांड में सुधार देखने को मिल रहा था। इसी का असर था कि Nestlé India और Hindustan Unilever जैसी बड़ी कंपनियों ने चौथी तिमाही में मजबूत कमाई दर्ज की थी। लेकिन अब बढ़ती फ्यूल कीमतें इस रिकवरी पर असर डाल सकती हैं।

डाबर और मैरिको ने बढ़ाईं कीमतें

रिपोर्ट के अनुसार, Dabur India और Marico जैसी कंपनियों ने लागत बढ़ने के कारण कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में 2 से 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। डाबर इंडिया के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी ने कारोबार के अलग-अलग हिस्सों में पहले ही करीब 4 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई हैं और आगे भी नई बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है।

ब्रिटानिया और HUL ने भी दिए संकेत

Britannia Industries और हिंदुस्तान यूनिलीवर के अधिकारियों ने भी अपनी हालिया earnings calls में संकेत दिए हैं कि अगर महंगाई का दबाव जारी रहा, तो कंपनियों को कीमतें और बढ़ानी पड़ सकती हैं। पार्ले प्रोडक्ट्स के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी मयंक शाह के मुताबिक, कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है, हालांकि इसकी मात्रा पर अभी चर्चा चल रही है।

ग्रामीण बाजारों पर पड़ सकता है बड़ा असर

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक उतार-चढ़ाव बना रहता है, तो इसका सबसे बड़ा असर ग्रामीण बाजारों पर पड़ेगा। वहां पहले से ही मांग कमजोर बनी हुई है और महंगाई बढ़ने से उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कंपनियां घटा सकती हैं प्रोडक्ट की मात्रा

ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के पार्टनर नवीन मालपानी के मुताबिक, अगर फ्यूल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों की मात्रा यानी grammage भी कम कर सकती हैं. इससे उपभोक्ताओं को कम मात्रा में सामान उसी कीमत पर मिल सकता है।

Nestlé India के MD मनीष तिवारी ने कहा कि कंपनी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि प्रोडक्ट्स की कीमतों में बदलाव करना हमेशा कंपनी का आखिरी विकल्प होता है।

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