डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहे हैं। चुनावी वादों को हकीकत में बदलते हुए नई सरकार ने राज्य में फल-फूल रहे अवैध टोल और ड्रॉप गेट सिंडिकेट की कमर तोड़ने की तैयारी कर ली है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने बुधवार को एक बेहद सख्त निर्देश जारी करते हुए राज्यव्यापी कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य में सरकार की अनुमति के बिना संचालित किए जा रहे सभी टोल प्लाजा, ड्रॉप गेट और बैरिकेड्स को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फरमान सुनाया गया है। यह कदम मुख्यमंत्री के उस वादे का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने परिवहन ऑपरेटरों को सिंडिकेट राज और सड़क किनारे होने वाली अवैध वसूली से मुक्ति दिलाने की बात कही थी। भाजपा ने चुनाव के दौरान टीएमसी पर आरोप लगाया था कि सरकारी संरक्षण में राज्य की सड़कों पर अवैध उगाही का खेल चल रहा है। अब सत्ता में आते ही सरकार ने इस भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है।
जिला मजिस्ट्रेटों को ‘डेडलाइन’ के साथ निर्देश
मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने राज्य की कानून-व्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए सभी जिला मजिस्ट्रेटों (DMs) को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सक्रिय अवैध टोल गेट, बैरिकेड्स और वसूली केंद्रों की तत्काल पहचान कर उन्हें हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि इन अवैध स्थानों पर किसी भी प्रकार के शुल्क या प्रभार की वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों से राज्य में संचालित हो रहे वैध और अवैध दोनों प्रकार के केंद्रों की एक विस्तृत और समेकित सूची मांगी गई है, जिसे 15 मई की दोपहर तक अनिवार्य रूप से अपर सचिव के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
अधिकृत केंद्रों की बनेगी सूची
सरकार केवल अवैध सेंटरों को बंद ही नहीं कर रही, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए वैध टोल केंद्रों की नई सूची तैयार कर रही है। इस सूची में वसूली करने वाली अथॉरिटी और उनकी निविदा (टेंडर) की अवधि का स्पष्ट उल्लेख होगा, ताकि भविष्य में कोई भी निजी या असंवैधानिक समूह सड़कों पर कब्जा कर अवैध वसूली न कर सके। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के बाद यह कार्रवाई संकेत है कि सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलेगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि परिवहन के नाम पर आम जनता और ट्रक चालकों को परेशान करने वाले सिंडिकेट्स का अंत अब निश्चित है। चुनाव के दौरान भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था और अब सरकार की प्राथमिकता राज्य की सड़कों को ‘सिंडिकेट मुक्त’ बनाना है। इस आदेश के लागू होने के बाद से ही परिवहन सेक्टर में राहत की लहर देखी जा रही है, जबकि अवैध संचालकों में हड़कंप मच गया है।