तमिलनाडु की सियासत में थलापति का विजय शंखनाद, बहुमत परीक्षण में पास हुए सीएम विजय, DMK का वॉकआउट

डिजिटल डेस्क- तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग का उदय हो गया है। अभिनेता से नेता बने ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद विधानसभा में अपनी पहली बड़ी अग्निपरीक्षा पास कर ली है। भारी गहमागहमी के बीच हुए फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार ने बहुमत साबित कर दिया है। सदन में टीवीके के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल विजय की कुर्सी पूरी तरह सुरक्षित है। वोटिंग से ठीक पहले सदन में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल DMK ने फ्लोर टेस्ट का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “तमिलनाडु की जनता को अब लगने लगा है कि उन्होंने वोट देकर बड़ी गलती की है। लगभग 65% लोगों ने विजय को मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।” उन्होंने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक सेक्युलर सरकार होनी चाहिए और लोग देख रहे हैं कि यह कितने दिन चलेगी।

AIADMK के समर्थन ने पलटा पासा

विजय की इस जीत में AIADMK के एक धड़े की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। हालांकि पार्टी के जनरल सेक्रेटरी ई. के. पलानीस्वामी ने विरोध दर्ज कराया, लेकिन पार्टी के एक बड़े गुट ने टीवीके का साथ दिया। फ्लोर टेस्ट से पहले कद्दावर नेता सीवी षणमुगम ने रुख साफ करते हुए कहा, “हमने TVK को समर्थन देने का फैसला इसलिए किया क्योंकि हमारी राजनीति पिछले 53 सालों से DMK के खिलाफ रही है। यदि हम DMK के साथ जाते, तो AIADMK का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी को फिर से जीवंत करने के लिए यह रणनीतिक फैसला जरूरी था।

सदन का गणित और अनुपस्थिति

बहुमत परीक्षण के दौरान सदन में कुल 144 वोट सरकार के पक्ष में पड़े। वहीं, AIADMK में स्पष्ट रूप से दो फाड़ नजर आए, जहाँ एक धड़ा समर्थन में खड़ा दिखा तो दूसरा विरोध में। इस महत्वपूर्ण कार्यवाही के दौरान 5 विधायक अनुपस्थित रहे, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद अब मुख्यमंत्री विजय के सामने अपनी चुनावी घोषणाओं को पूरा करने और गठबंधन के अंतर्विरोधों को संभालने की चुनौती है। डीएमके के कड़े तेवरों और एआईएडीएमके के भीतर चल रही खींचतान के बीच ‘थलापति’ विजय के लिए सत्ता की यह राह कांटों भरी हो सकती है। फिलहाल, चेन्नई की गलियों में टीवीके समर्थकों के बीच जश्न का माहौल है और इसे द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक गढ़ में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *