KNEWS DESK : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना आम बात हो गई है। खासतौर पर डेस्क जॉब करने वाले लोग अक्सर कंधों में जकड़न, पीठ दर्द, गर्दन में अकड़न और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने लोगों को गोमुखासन करने की सलाह दी है। मंत्रालय का मानना है कि शरीर की मांसपेशियों में लगातार तनाव और कम शारीरिक गतिविधि कई गंभीर परेशानियों की वजह बनती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर की लचक कम हो जाती है, जिसका असर सांस लेने की क्षमता, रीढ़ की हड्डी और शरीर के पोस्चर पर भी दिखाई देने लगता है। गोमुखासन इन समस्याओं को दूर करने में बेहद मददगार माना जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह योगासन शरीर की जकड़ी हुई मांसपेशियों को खोलने और शरीर को संतुलित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। गोमुखासन करने से छाती खुलती है, जिससे फेफड़ों को पर्याप्त जगह मिलती है और सांस लेना आसान होता है। यही कारण है कि अस्थमा या सांस से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए भी इसे फायदेमंद बताया जाता है। इसके अलावा यह आसन कंधों, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को गहराई से खींचता है, जिससे लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाला तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गोमुखासन सिर्फ शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है। नियमित अभ्यास करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और थकान कम महसूस होती है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद करता है, जिससे शरीर का पोस्चर सुधरता है और झुककर बैठने की आदत में सुधार आता है। लगातार कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करने वाले लोगों के लिए यह योगासन किसी प्राकृतिक थेरेपी की तरह काम कर सकता है। इसके अभ्यास से शरीर हल्का महसूस होता है और मानसिक तनाव भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।
विश्व योग दिवस की तैयारियों के बीच आयुष मंत्रालय लोगों को ऐसे योगासनों के प्रति जागरूक कर रहा है, जिन्हें घर पर आसानी से किया जा सके। गोमुखासन भी उन्हीं आसान लेकिन असरदार योगासनों में शामिल है। हालांकि, इसे करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। शुरुआत में शरीर को अधिक खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाना चाहिए। जिन लोगों को घुटनों, कंधों या रीढ़ से जुड़ी गंभीर समस्या है, उन्हें योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए।