डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व फायरब्रांड नेता आजम खां के लिए कानून की दहलीज से एक राहत भरी खबर आई है। रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट (नॉन सेशन) ने बहुचर्चित शत्रु संपत्ति से जुड़े मामले में आजम खां की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। यह मामला जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के आरोपों से संबंधित है, जिसमें लंबे समय से कानूनी बहस चल रही थी। हालांकि, इस कानूनी जीत के बाद भी आजम खां की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। भले ही उन्हें शत्रु संपत्ति मामले में जमानत मिल गई हो, लेकिन वे अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इसका मुख्य कारण यह है कि आजम खां अभी कई अन्य संगीन मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं और कुछ मामलों में उन्हें पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। वर्तमान में वे सीतापुर जेल में अपनी सजा काट रहे हैं और जब तक अन्य सभी विचाराधीन मामलों में राहत नहीं मिलती, उनकी रिहाई संभव नहीं है।
क्या है पूरा शत्रु संपत्ति मामला?
यह पूरा विवाद रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि आजम खां ने सत्ता में रहते हुए वक्फ बोर्ड और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर ‘शत्रु संपत्ति’ (वह संपत्ति जो देश विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए लोगों की थी) को यूनिवर्सिटी की जमीन में शामिल कर लिया था। इस मामले में प्रशासन ने उन पर धोखाधड़ी और अवैध कब्जे की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें अब कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
आजम खां को मिली इस जमानत के बाद रामपुर और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि विरोधियों का कहना है कि अन्य मामलों की गंभीरता को देखते हुए आजम खां को अभी लंबे समय तक कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। रामपुर की राजनीति में दशकों तक दबदबा रखने वाले आजम खां के लिए यह जमानत एक मनोवैज्ञानिक जीत के रूप में देखी जा रही है।