शिव शंकर सविता- कुदरत के क्रूर खेल और नियति के अजीब फैसले की एक ऐसी तस्वीर बलिया से सामने आई है, जिसे देख पत्थर दिल भी पिघल जाए। जिस घर से गाजे-बाजे के साथ बारात निकलनी थी, वहां से छोटे भाई की अर्थी उठी। लेकिन फर्ज और वचन की खातिर, अस्पताल के बिस्तर से उठकर मौत से जूझ रहे दूल्हे ने अर्टिगा गाड़ी के भीतर ही दुल्हन की मांग भरी। आंखों से बहते आंसुओं और भारी मन के बीच यह शादी संपन्न हुई, जिसे देख वहां मौजूद हर शख्स फफक पड़ा। घटना पकड़ी थाना क्षेत्र के बनकटा गांव की है। 22 वर्षीय अंकित पांडेय की शादी बांसडीह निवासी प्रमिला के साथ तय थी। शुक्रवार की शाम घर में ‘परछावन’ की रस्म हो रही थी। चारों तरफ हंसी-ठिठोली और मंगल गीत गाए जा रहे थे। अंकित अपने छोटे भाई सर्वजीत (18 वर्ष) के साथ बाइक से दाढ़ी बनवाने पास की चट्टी पर गया था। किसी को नहीं पता था कि यह सफर खुशियों का आखिरी सफर साबित होगा। वापस लौटते समय एक स्कूल बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
भाई को खोया, खुद ट्रामा सेंटर पहुंचा दूल्हा
हादसे के बाद खुशियां पल भर में मातम में तब्दील हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान छोटे भाई सर्वजीत ने दम तोड़ दिया, जबकि दूल्हा अंकित ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने लगा। छोटे भाई की मौत की खबर ने दोनों परिवारों को झकझोर कर रख दिया। बारात की जगह घर में मातम छा गया और दुल्हन के घर भी सन्नाटा पसर गया।
अस्पताल की गाड़ी बनी ‘मंडप’, आंसुओं से भीगा सिंदूर
ऐसी कठिन घड़ी में दोनों परिवारों ने एक साहसी लेकिन भावुक फैसला लिया। दूल्हे की गंभीर हालत और छोटे भाई की मौत के बावजूद, यह तय हुआ कि रस्म अधूरी नहीं छोड़ी जाएगी। डॉक्टरों से विशेष अनुमति लेकर अंकित को कुछ देर के लिए अस्पताल से बांसडीह लाया गया। वह चल पाने की स्थिति में नहीं था, इसलिए वह जिस अर्टिगा गाड़ी में आया था, वही गाड़ी ‘मंडप’ बन गई। कोई बैंड-बाजा नहीं था, न ही कोई आतिशबाजी; बस चारों तरफ सिसकियां थीं। इसी गाड़ी के भीतर अंकित ने प्रमिला की मांग में सिंदूर भरा। शादी की रस्म पूरी होते ही दूल्हे को तुरंत वापस अस्पताल ले जाया गया।
हर आंख हुई नम
इस विवाह का गवाह बना हर ग्रामीण अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाया। एक तरफ भाई के जाने का गम और दूसरी तरफ घायल अवस्था में वैवाहिक बंधन की मजबूरी। लोग कह रहे थे कि ऐसी शादी न कभी देखी और न ही कभी सुनी। जिस उम्र में सर्वजीत को भाई की बारात में नाचना था, उसी वक्त उसकी चिता सज रही थी।