शिव शंकर सविता- चुनाव के नतीजों और प्रक्रिया के संपन्न होते ही देश की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र की भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए अखिलेश यादव ने सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को लेकर जारी की गई हालिया अपीलों और पाबंदियों को ‘विफलता की स्वीकारोक्ति’ करार दिया है। अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट की शुरुआत बेहद तल्ख अंदाज में की। उन्होंने लिखा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक ‘संकट’ की याद आ गई है। सपा अध्यक्ष ने सीधे तौर पर कहा, “देश के लिए संकट सिर्फ एक है और उसका नाम भाजपा है।” उन्होंने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को ‘जुमलाई’ बताते हुए सवाल उठाया कि यदि इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं, तो अर्थव्यवस्था मजबूत कैसे होगी?
रुपये की गिरावट और सोने पर सियासत
देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए अखिलेश ने कहा कि डॉलर आसमान छू रहा है और रुपया पाताल की ओर जा रहा है। सरकार द्वारा जनता से सोना न खरीदने की अपील पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जनता के पास तो वैसे भी डेढ़ लाख रुपये तोला सोना खरीदने की हैसियत नहीं बची है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को यह अपील अपने उन भ्रष्ट नेताओं से करनी चाहिए जो अपनी काली कमाई को सोने में बदल रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर मेरी बात गलत लगे तो लखनऊ से गोरखपुर और अहमदाबाद से गुवाहाटी तक जांच करवा लीजिए।”
चुनाव बनाम पाबंदियां: भाजपा की नीतियों पर सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं? उन्होंने चुनावी प्रचार का जिक्र करते हुए पूछा, “चुनाव में भाजपाइयों ने जो हजारों चार्टर प्लेन उड़ाए, क्या वे पानी से चल रहे थे? क्या भाजपाई होटलों में नहीं ठहर रहे थे? तब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं किया गया?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इन अपीलों से बाजार में मंदी, महंगाई और घबराहट का माहौल पैदा होगा।
विदेश नीति और गुट निरपेक्षता का मुद्दा
सपा अध्यक्ष ने देश की मौजूदा आर्थिक बदहाली के लिए भाजपा सरकार की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी पारंपरिक ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भटक गया है और कुछ खास गुटों के दबाव में काम कर रहा है। इसी का खामियाजा आज देश का किसान, मजदूर, युवा और गृहणियां महंगाई और बेरोजगारी के रूप में भुगत रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने हमले को धार देते हुए कहा कि भाजपा ने न केवल अर्थव्यवस्था, बल्कि देश की संस्कृति, राजनीति और सामाजिक सौहार्द को भी प्रदूषित कर दिया है। उन्होंने अंत में एक नारा देते हुए कहा कि जनता में अब आक्रोश का उबाल है और इसे किसी ‘चुनावी जुगाड़’ से शांत नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा “देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!”