KNEWS DESK- सनातन धर्म में भगवान शिव को सबसे सरल और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई शिव साधना भक्त के जीवन के सभी कष्टों को दूर कर सकती है। विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा का अत्यंत महत्व बताया गया है। शास्त्रों में शिव पूजा से जुड़े कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं और महादेव का विशेष आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं शिव पूजा के 7 महत्वपूर्ण नियमों के बारे में।
1. शिव पूजा में पहनें पवित्र और हल्के रंग के वस्त्र
भगवान शिव की आराधना करते समय साधक को प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो बिना सिले सफेद वस्त्र पहनकर शिव साधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
2. सही दिशा और आसन का रखें विशेष ध्यान
शिव पूजा हमेशा घर के ईशान कोण या मंदिर में करनी चाहिए। पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। साथ ही पूजा भूमि पर सीधे बैठकर नहीं, बल्कि किसी पवित्र आसन पर बैठकर करनी चाहिए। शिव साधना के लिए ऊनी आसन का प्रयोग सबसे उत्तम माना गया है।
3. गंगाजल और बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है शिव पूजा
भगवान शिव को गंगाजल और बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान तांबे के पात्र से शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना चाहिए। वहीं बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी डंडी तोड़कर उसे उल्टा करके अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
4. शिव पूजा में इन चीजों का करें प्रयोग, इनसे बचें
महादेव की पूजा में धतूरा, भांग, बेल फल, सफेद पुष्प, सफेद चंदन और आक के फूल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन पूजा के दौरान तुलसी दल, केतकी का फूल, सिंदूर और शंख का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इन्हें शिव पूजा में वर्जित माना गया है।
5. भस्म और रुद्राक्ष का महत्व
भगवान शिव की पूजा में भस्म और रुद्राक्ष का विशेष स्थान है। सोमवार के दिन शिव पूजा करते समय महादेव को भस्म और रुद्राक्ष अर्पित करें। साथ ही स्वयं भी माथे पर भस्म का त्रिपुंड लगाएं और रुद्राक्ष की माला धारण करें। इससे शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
6. शिवलिंग अभिषेक करते समय न करें ये गलतियां
सोमवार के दिन शिवलिंग का गाय के कच्चे दूध से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। ध्यान रखें कि दूध सीधे प्लास्टिक के पैकेट से अर्पित न करें और न ही उबला हुआ दूध चढ़ाएं। पूजा के अंत में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें और जलहरी को कभी पार न करें।
7. पारद या नर्मदेश्वर शिवलिंग को बार-बार न बदलें
यदि घर में पारद या नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है, तो उसका स्थान बार-बार बदलना अशुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश स्थान परिवर्तन आवश्यक हो, तो पहले भगवान शिव से क्षमा याचना करें और किसी योग्य पुजारी की सहायता से विधि-विधान के साथ पुनः स्थापना करें।
भगवान शिव की पूजा अत्यंत सरल मानी जाती है, लेकिन पूजा के दौरान नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। श्रद्धा, पवित्रता और सही विधि से की गई शिव साधना साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है। यदि आप भी भोलेनाथ की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन 7 नियमों का पालन अवश्य करें।