संकट में आयुष्मान भारत? बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने योजना से बनाई दूरी, कम रिइम्बर्समेंट और पेमेंट में देरी बनी बड़ी वजह

डिजिटल डेस्क- केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB PM-JAY), जिसे दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना माना जाता है, वर्तमान में एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स और हालिया वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, देश के बड़े निजी अस्पताल समूह अब इस सरकारी स्वास्थ्य योजना से बाहर निकलने या इसमें अपनी भागीदारी कम करने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो देश के करोड़ों गरीब परिवारों के लिए प्रीमियम स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का सपना टूट सकता है।

क्यों पीछे हट रहे हैं निजी अस्पताल?

इकॉनोमिक टाइम्स (ET) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख अस्पताल शृंखलाओं के कुल राजस्व (Revenue) में सरकारी योजनाओं की हिस्सेदारी लगातार गिर रही है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं:

  1. कम रिइम्बर्समेंट रेट: सरकार द्वारा विभिन्न ऑपरेशनों और उपचारों के लिए तय की गई दरें अस्पतालों की ‘ऑपरेशनल कॉस्ट’ (परिचालन लागत) से काफी कम हैं। प्रीमियम सुविधाएं देने वाले अस्पतालों का कहना है कि इतने कम दाम पर इलाज करना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
  2. भुगतान में देरी: सरकारी एजेंसियों की ओर से क्लेम सेटलमेंट में होने वाली देरी ने अस्पतालों के सामने ‘कैश फ्लो’ (नकद प्रवाह) का संकट खड़ा कर दिया है।
  3. रिटर्न का दबाव: देश के कई बड़े मेडिकल सेंटर अब प्राइवेट इक्विटी फर्मों के स्वामित्व में हैं। इन फर्मों का लक्ष्य 18-25% का रिटर्न प्राप्त करना होता है। महंगे उपकरणों और विशेषज्ञों की भारी फीस के कारण ये अस्पताल अब सरकारी योजना के बजाय कैश-पेइंग और निजी इंश्योरेंस वाले मरीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

70+ बुजुर्गों के लिए बढ़ी चुनौती

हाल ही में सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को इसके दायरे में शामिल किया है। इससे लाभार्थियों की संख्या में भारी उछाल आया है। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि जब बड़े अस्पताल ही इस योजना से हाथ खींच लेंगे, तो बढ़ी हुई आबादी को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल करीब 30 प्रतिशत भारतीय अभी भी किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य बीमा से वंचित हैं।

ग्रामीण आबादी पर पड़ेगा सबसे बुरा असर

आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और वंचित आबादी को बड़े शहरों के अच्छे अस्पतालों में मुफ्त इलाज दिलाना था। बड़े अस्पताल मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं। यदि ये अस्पताल अपनी रणनीति बदलते हैं और केवल अधिक मुनाफे वाले ट्रीटमेंट पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए अच्छे इलाज का संकट और गहरा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *