Knews Desk- Apple ने भारत में अपने iPhone की अवैध सप्लाई और ग्रे मार्केट गतिविधियों पर सख्त कदम उठाते हुए बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने कई डिस्ट्रीब्यूटर के साथ संबंध खत्म कर दिए हैं और रिटेल सिस्टम में नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। यह फैसला उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें भारत में सस्ते iPhone खरीदकर विदेशों में ऊंचे दाम पर बेचने का मामला सामने आया था।
डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क पर कार्रवाई

रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple ने भारत में कई डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें पंजाब के कुछ डिस्ट्रीब्यूटर, साथ ही मुंबई, हरियाणा और दक्षिण भारत के कुछ पार्टनर्स शामिल बताए जा रहे हैं। कंपनी को शक है कि ये नेटवर्क iPhone को ग्रे मार्केट में सप्लाई कर रहे थे, जहां से इन्हें रूस, अफ्रीका और पश्चिम एशिया जैसे देशों में अधिक मुनाफे पर बेचा जा रहा था। कंपनी फिलहाल अन्य डिस्ट्रीब्यूटर की भी जांच कर रही है और आने वाले समय में और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
अब दुकान में ही होगा iPhone का एक्टिवेशन
नए नियमों के तहत अब हर iPhone को ग्राहक को देने से पहले स्टोर में ही एक्टिवेट करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें फोन का बॉक्स खोलना, सिम डालना, डिवाइस ऑन करना और पूरा सेटअप शामिल होगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फोन सीधे अंतिम ग्राहक के उपयोग में जाए और उसका इस्तेमाल किसी भी तरह के एक्सपोर्ट या री-सेलिंग नेटवर्क में न हो सके। रिटेलर्स को चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर उनका स्टोर ब्लॉक किया जा सकता है और सप्लाई रोक दी जाएगी।
सप्लाई चेन पर सख्त निगरानी
Apple अब भारत में अपनी सप्लाई चेन पर और सख्त नियंत्रण कर रही है। कंपनी बड़े और भरोसेमंद पार्टनर्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है और प्रीमियम रिटेलर्स के कॉन्ट्रैक्ट की अवधि भी घटाने की योजना में है। नई व्यवस्था के तहत हर बिक्री का रिकॉर्ड एक्टिवेशन डेटा से जोड़ा जाएगा। यानी फोन तभी वैध माना जाएगा जब वह ग्राहक द्वारा एक्टिवेट किया जाएगा।
ग्रे मार्केट पर रोक लगाने की कोशिश
कंपनी ने नई बिलिंग प्रणाली भी लागू की है, जिसमें iPhone केवल एमआरपी पर बेचे जाएंगे। रिटेलर्स को उनका मार्जिन बाद में वेरिफिकेशन के बाद क्रेडिट नोट के जरिए दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी फोन अनऑथराइज्ड तरीके से बाहर न भेजा जाए। Apple का यह कदम भारत में iPhone की सप्लाई और कीमतों को स्थिर रखने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे न केवल ग्रे मार्केट पर रोक लगेगी, बल्कि ग्राहकों को भी सही कीमत और सही चैनल से उत्पाद मिलने की संभावना बढ़ेगी।