डिजिटल डेस्क- देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझानों ने आज पूरे देश को चौंका दिया है। सबसे बड़ा उलटफेर दक्षिण के राज्य तमिलनाडु में देखने को मिल रहा है, जहाँ एग्जिट पोल्स के तमाम दावे धरे के धरे रह गए हैं। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन समेत द्रमुक (DMK) सरकार के 15 दिग्गज मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर पिछड़ रहे हैं। वहीं, बंगाल में भाजपा बहुमत के आंकड़े को पार कर ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है।
तमिलनाडु: स्टालिन के किले में ‘सुनामी’, 15 मंत्रियों की सीट फंसी
तमिलनाडु के चुनावी रुझान इस वक्त किसी बड़े राजनीतिक भूकंप से कम नजर नहीं आ रहे हैं, जहाँ सत्ताधारी द्रमुक के पैर उखड़ते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में जिस जीत को पक्का माना जा रहा था, वह अब गंभीर संकट में है; खुद सीएम स्टालिन अपनी पारंपरिक कोलाथुर सीट से पीछे चल रहे हैं और उनके मंत्रिमंडल के 15 अहम मंत्री भी अपनी सीटों पर कड़े संघर्ष के बीच पिछड़ गए हैं। इस सियासी उलटफेर के बीच अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलनाडु वेत्री कझगम’ एक नई ताकत बनकर उभरी है, जिसने शुरुआती घंटों में ही जबरदस्त बढ़त बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय कर दिया है। वहीं, अन्नाद्रमुक भी कई सीटों पर मजबूती से वापसी करती दिख रही है, जिससे राज्य की राजनीति में दशकों बाद ऐसा मंजर देखने को मिल रहा है जहाँ सत्ता पक्ष के इतने दिग्गज चेहरे एक साथ हार की कगार पर खड़े हैं।
पश्चिम बंगाल: बहुमत के पार भाजपा, टीएमसी की कड़ी टक्कर
बंगाल में भी आज ‘खेला’ होता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रुझानों में 150 का आंकड़ा पार कर लिया है, जो बहुमत (148) से ऊपर है। हालांकि, ममता बनर्जी की टीएमसी भी हार मानने को तैयार नहीं है और 100 के करीब सीटों पर डटी हुई है। कई सीटों पर फासला इतना कम है कि अगले कुछ घंटों में आंकड़े फिर बदल सकते हैं।
केरल और असम: सत्ता परिवर्तन और स्थिरता की लहर
ुकेरल के चुनावी रुझानों में इस बार सत्ता परिवर्तन की लहर साफ दिखाई दे रही है, जहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) गठबंधन ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की एलडीएफ सरकार के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। यूडीएफ फिलहाल स्पष्ट बढ़त के साथ सत्ता की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है, जिससे एलडीएफ का लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का सपना टूटता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर, असम में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा बरकरार है और पार्टी अपनी ऐतिहासिक ‘जीत की हैट्रिक’ लगाने के बेहद करीब पहुँच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कुशल नेतृत्व में भाजपा ने चुनावी दौड़ में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को काफी पीछे छोड़ दिया है, जो राज्य में पार्टी की पकड़ और जनता के भरोसे को और मजबूत करता है।