डिजिटल डेस्क- पंजाब की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों और गंभीर आरोपों के टकराव का गवाह बना। मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के श्रमिकों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान किया, लेकिन सत्र की कार्यवाही विपक्षी दलों के तीखे हमलों और ‘अल्कोहल टेस्ट’ की मांग की भेंट चढ़ गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में घोषणा की कि पंजाब में न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है। यह फैसला सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों पर लागू होगा। सीएम मान ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, “2013 से दो सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने मजदूरों की सुध नहीं ली। यह हमारी सरकार का श्रमिकों को सम्मानजनक तोहफा है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब मजदूर के बच्चे पढ़ेंगे और जेईई (JEE) जैसी परीक्षाएं पास करेंगे, तभी उनके घरों की गरीबी दूर होगी।
विपक्ष का ‘अल्कोहल टेस्ट’ वाला वार: सदन से वॉकआउट
सत्र के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस और अकाली दल ने मुख्यमंत्री पर ‘शराब पीकर सदन में आने’ का संगीन आरोप लगा दिया। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मांग की कि सदन में ‘एल्कोमीटर’ मंगवाया जाए और सभी सदस्यों का टेस्ट हो। कांग्रेस विधायकों ने “शराबी मुख्यमंत्री मुर्दाबाद” के नारे लगाए और सदन से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, विधानसभा स्पीकर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना आधार के किसी भी सदस्य के खिलाफ ऐसी टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। इस पर पलटवार करते हुए सीएम मान ने कहा, “कांग्रेस शुरू से ही मजदूर विरोधी रही है, ये लोग बस बाहर भागने का बहाना ढूंढते हैं।”
भाजपा की ‘जनता दी विधानसभा’: जाखड़ का बड़ा दावा
सदन के बाहर भाजपा ने भी मोर्चा खोल रखा है। भाजपा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में पंजाब विधानसभा के समानांतर अपनी ‘जनता दी विधानसभा’ आयोजित की। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि कैबिनेट बैठक में दो मंत्रियों और मुख्य सचिव के साथ अभद्र व्यवहार किया गया है। जाखड़ ने मांग की कि फ्लोर टेस्ट से पहले सत्तापक्ष के नेताओं का ‘ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट’ होना चाहिए।
विश्वास प्रस्ताव और राजनीतिक दांव-पेंच
तमाम हंगामे के बीच आम आदमी पार्टी सरकार ने विधानसभा में ‘विश्वास प्रस्ताव’ भी पेश किया। राजनीति के जानकारों का मानना है कि एक तरफ मजदूरों को साधकर और दूसरी तरफ विश्वास प्रस्ताव लाकर भगवंत मान अपनी पकड़ मजबूत दिखाना चाहते हैं, जबकि विपक्ष ने ‘मर्यादा’ के मुद्दे पर सरकार को घेरकर इस जश्न के रंग में भंग डाल दिया है। पंजाब की सियासत अब केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह व्यक्तिगत आरोपों और हाई-टेक टेस्ट की मांग तक पहुंच गई है। अब देखना यह है कि मजदूरी में हुई यह 15% की बढ़ोतरी आगामी चुनावों में ‘आप’ के लिए कितना ‘विश्वास’ बटोर पाती है।