Knews Desk-महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार और यात्रियों तथा चालकों के बीच संवाद को बेहतर बनाने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम ‘चला मराठी बोलूया’ रखा गया है, जिसके तहत ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को मराठी भाषा सिखाई जाएगी। यह 100 दिवसीय अभियान 1 मई, महाराष्ट्र दिवस से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान राज्य भर के ऑटो-टैक्सी चालकों, जिनमें ओला और उबर जैसे ऐप-आधारित कैब चालक भी शामिल हैं, को रोजमर्रा की मराठी भाषा सिखाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे यात्रियों और चालकों के बीच संवाद आसान होगा और भाषा की बाधा कम होगी।
परिवहन विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में काम करने वाले कई चालक दूसरे राज्यों से आते हैं और मुख्य रूप से हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषा में ही बातचीत करते हैं। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है, जो हिंदी या अन्य भाषाओं में सहज नहीं होते। इस समस्या को देखते हुए यह पहल शुरू की गई है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि मराठी राज्य की राजभाषा है और महाराष्ट्र में काम करने वाले हर व्यक्ति को इसे सीखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लाइसेंस और बैज लेते समय चालक मराठी सीखने का शपथपत्र देते हैं, लेकिन व्यवहार में इसका पालन नहीं होता। सरकार चाहती है कि इस अंतर को दूर किया जाए।

इस अभियान के तहत सरकार ने एक विशेष मराठी बुकलेट तैयार की है, जिसमें दैनिक उपयोग में आने वाले वाक्य और शब्द शामिल हैं। यह बुकलेट राज्य के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में वितरित की जाएगी। इसके जरिए चालक आसानी से बुनियादी मराठी सीख सकेंगे और यात्रियों से संवाद कर पाएंगे। मंत्रालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस बुकलेट का औपचारिक रूप से विमोचन किया गया। सरकार का दावा है कि यह पहल केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मराठी और गैर-मराठी भाषी लोगों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना भी है।
परिवहन मंत्री ने कहा कि यह कदम सामाजिक समरसता और बेहतर सेवा अनुभव की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 1989 के नियमों के अनुसार महाराष्ट्र में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए मराठी भाषा का ज्ञान आवश्यक है।
सरकार ने चालकों को 15 अगस्त तक का समय दिया है ताकि वे इस अभियान के तहत मराठी भाषा की बुनियादी समझ विकसित कर सकें। उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य में भाषा आधारित संवाद भी अधिक प्रभावी और सहज हो जाएगा।