वैशाख पूर्णिमा पर बनेगा सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, इस शुभ समय में करें जप-तप और स्नान-दान, खुल जाएंगे भाग्य के द्वार !

KNEWS DESK- हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का अत्यंत महत्व होता है, लेकिन वैशाख मास की पूर्णिमा को सबसे पवित्र और फलदायी माना गया है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख पूर्णिमा का व्रत 1 मई को रखा जाएगा। इस बार यह तिथि और भी खास है, क्योंकि इस दिन दुर्लभ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो हर शुभ कार्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सिद्धि योग सुबह से लेकर रात 9:13 बजे तक प्रभावी रहेगा। यह योग विशेष रूप से जप, तप, ध्यान और दान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है, जिससे साधकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है।

स्वाति नक्षत्र का प्रभाव

वैशाख पूर्णिमा के दिन स्वाति नक्षत्र का भी संयोग रहेगा, जो 2 मई सुबह 4:35 बजे तक प्रभावी रहेगा। यह नक्षत्र आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा और ध्यान विशेष फलदायी होते हैं।

किन देवताओं की करें पूजा?

इस पावन दिन पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना से धन, वैभव और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। चंद्र देव की पूजा करने से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है।

पूजा विधि: कैसे करें व्रत और आराधना?

सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें और “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप करें। इसके बाद स्वच्छ, हल्के रंग के वस्त्र विशेषकर पीले या सफेद धारण करें।

पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें। यदि शंख उपलब्ध हो, तो उससे जल अर्पित करना और भी शुभ माना जाता है।

शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करें। तांबे के लोटे में जल, दूध, चावल और फूल डालकर चंद्र देव को अर्पित करें और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद सात्विक भोजन या फलाहार ग्रहण करें।

स्नान और दान का महत्व

वैशाख पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है। इस दिन विशेष रूप से:

  • सत्तू, जल से भरा घड़ा, फल और वस्त्र का दान करना अक्षय पुण्य देता है।
  • विष्णु-लक्ष्मी पूजन से आर्थिक तंगी दूर होती है।
  • चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव कम होता है और कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।

वैशाख पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और पुण्य अर्जित करने का विशेष अवसर है। सिद्धि योग और स्वाति नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में की गई पूजा, दान और साधना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक मानी जाती है।