बागी 7 राज्यसभा सांसदों पर आम आदमी पार्टी का एक्शन, सदस्यता रद्द करने के लिए सभापति को भेजी अर्जी

KNEWS DESK – पंजाब की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी ने अपने सात राज्यसभा सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन को औपचारिक शिकायत भेजी है।

ये सभी सात सांसद हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे, जिसके बाद AAP ने इसे दलबदल करार देते हुए कार्रवाई शुरू कर दी।

संजय सिंह ने उठाए सवाल

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे पर संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली है। इसमें वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचार्य शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन सांसदों को कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि एजेंसियों के दबाव में सांसदों को तोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल कराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत ऐसे दलबदल को मान्यता नहीं दी जा सकती।

कानून क्या कहता है?

इस पूरे मामले में कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। AAP का दावा है कि यह दलबदल असंवैधानिक है और सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ पार्टी बदलते हैं, तो इसे ‘विलय’ (मर्जर) माना जा सकता है, जो एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत मान्य है।

इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा था। हालांकि, भारतीय संविधान में सांसदों या विधायकों को ‘रिकॉल’ करने का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे यह रास्ता सीमित हो जाता है।

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