सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जहां किसी व्यक्ति की उपलब्धियों या भावनात्मक पोस्ट से ज्यादा उसके पहनावे या निजी जीवन पर टिप्पणी की जाती है। ऐसा ही एक मामला भारतीय वायु सेना (IAF) की रिटायर्ड अधिकारी और लाइफ कोच अंजनी मिश्रा के साथ सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर महिलाओं की आपसी सोच और “मोरल पुलिसिंग” को फिर से चर्चा में ला दिया है।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अंजनी मिश्रा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में वह अपनी मां द्वारा भेजे गए अचार के बारे में बात कर रही थीं और उससे जुड़ी भावनाओं को साझा कर रही थीं। यह वीडियो काफी सादा और भावनात्मक था, जिसे कई लोगों ने पसंद किया और उनकी सादगी की तारीफ भी की। लेकिन इसी बीच एक महिला यूजर ने उनके पहनावे, खासकर उनकी शर्ट के खुले बटन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। उस टिप्पणी में उन्हें शालीनता और मर्यादा का पाठ पढ़ाने की कोशिश की गई।
https://www.instagram.com/reel/DXIzUGVjKit/?utm_source=ig_web_copy_link&igsh=MzRlODBiNWFlZA==
अंजनी मिश्रा ने उस महिला यूजर की टिप्पणी को “मोरल पुलिसिंग” और “बॉडी शेमिंग” करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी महिला के पहनावे को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह समाज में गलत संदेश भी देता है। उन्होंने अपने जवाब में बेहद सख्त लहजे में कहा कि “मां को मत सिखाया करो”, जो बाद में उनके पोस्ट का एक प्रमुख संदेश बन गया और तेजी से वायरल हो गया।
इस घटना के बाद अंजनी मिश्रा ने उस आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले अकाउंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट भी किया, ताकि इस तरह की ऑनलाइन बदसलूकी पर कार्रवाई हो सके। उनका कहना था कि सोशल मीडिया को अभिव्यक्ति और संवाद का माध्यम होना चाहिए, न कि किसी की व्यक्तिगत आलोचना या मानसिक उत्पीड़न का मंच।
यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और हजारों लोगों ने अंजनी मिश्रा के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने लिखा कि महिलाओं के बीच भी इस तरह की आलोचना और नकारात्मकता एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। कुछ लोगों ने कहा कि असली समस्या कपड़ों में नहीं, बल्कि सोच में है, जो आज भी कई स्तरों पर सीमित और पूर्वाग्रह से भरी हुई है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सोशल मीडिया पर महिलाओं की सफलता, भावनाओं और व्यक्तित्व को उनके पहनावे से जोड़ा जाना सही है? अंजनी मिश्रा का यह रुख न केवल व्यक्तिगत आत्मसम्मान का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अब कई महिलाएं इस तरह की टिप्पणियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रही हैं और चुप रहने के बजाय जवाब देना चुन रही हैं।