भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम दौर में, कभी भी हो सकता है ऐलान, टैरिफ कटौती से ‘मेड इन इंडिया’ को बड़ा फायदा

डिजिटल डेस्क- भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच चल रही उच्चस्तरीय बातचीत के बाद जल्द ही इस समझौते का औपचारिक ऐलान हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में शुरुआती दौर की बैठकों के बाद अब वॉशिंगटन में चर्चा जारी है, जहां डील पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच बातचीत काफी सकारात्मक और प्रोडक्टिव रही है। अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं। माना जा रहा है कि यह समझौता भारत की सक्रिय कूटनीति और रणनीतिक संतुलन का परिणाम है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है।

फर्स्ट ट्रेंच लगभग फाइनल

इस ट्रेड डील का पहला चरण यानी ‘फर्स्ट ट्रेंच’ लगभग फाइनल हो चुका है। भारत की ओर से वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन और अमेरिका की ओर से यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के ब्रेंडन लिंच इस बातचीत को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया है कि कई अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए यह समझौता एक बड़ा कदम साबित होगा।

भारतीय उत्पाद में लगने वाले टैरिफ को घटाने का रखा गया लक्ष्य

इस डील का सबसे अहम पहलू टैरिफ में कटौती है। फरवरी में तय फ्रेमवर्क के मुताबिक, जिन भारतीय उत्पादों पर पहले 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, उसे घटाकर करीब 18 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका सीधा फायदा ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को मिलेगा, जो अमेरिकी बाजार में सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इससे चीन के उत्पादों को भी कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल 20 से 22 अप्रैल तक वॉशिंगटन में मौजूद है, जहां द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ नीतियों में हालिया बदलाव, जैसे इस साल की शुरुआत में लागू किया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ, कुछ शर्तों पर पुनर्विचार की जरूरत पैदा कर रहा है।

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