KNEWS DESK – भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और बहुमुखी प्रतिभा की धनी आशा भोसले के निधन की खबर ने देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी है। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके जाने के साथ ही भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय मानो समाप्त हो गया।
संघर्षों से भरा था सफर
आशा भोसले का जीवन जितना सुरों से सजा था, उतना ही संघर्षों से भरा हुआ भी था। उनका जन्म सांगली में संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। छोटी उम्र में ही पिता के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया।
उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने जहां परिवार की जिम्मेदारी संभाली, वहीं आशा भोसले ने भी कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया और संघर्ष के रास्ते पर निकल पड़ीं।
पहचान बनाने की जंग
उस दौर में लता मंगेशकर इंडस्ट्री की सबसे बड़ी आवाज बन चुकी थीं, ऐसे में आशा भोसले के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था। उन्हें अक्सर बी-ग्रेड फिल्मों के गाने मिलते थे या वे गाने, जिन्हें अन्य गायिकाएं ठुकरा देती थीं।
16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी के बाद उनकी जिंदगी और चुनौतीपूर्ण हो गई। बाद में उन्होंने 1980 में मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से शादी की, जिनके साथ उनकी जोड़ी बेहद सफल रही।
हर अंदाज में बेमिसाल
ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गीत दिए। फिल्म नया दौर के चुलबुले गीत हों या उमराव जान की गहरी गजलें, हर शैली में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। फिल्म रंगीला में “तन्हा-तन्हा” जैसे गानों से उन्होंने यह साबित कर दिया कि उम्र उनके हुनर के आगे कभी बाधा नहीं बन सकती।
“दिल चीज क्या है” और “दम मारो दम” जैसे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। आशा भोसले भले ही आज हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज और उनका संगीत हमेशा जिंदा रहेगा।