उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, राज्य में होने जा रहे चुनावी साल में धामी सरकार एक्शन में है. पहले धामी सरकार ने बीते दिनों कैबिनेट विस्तार किया. जिसमें पांच विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया. इसके बाद धामी सरकार ने दायित्वों की गठरी खोली.जिसमें पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को सौगात दी गई और अब धामी सरकार ने जिसके आदेश जारी कर दिये हैं.उत्तराखंड में दायित्व बंटवारे के कयास कैबिनेट विस्तार के साथ ही लगने शुरू हो गये थे. जिसे अप्रैल में ही धामी सरकार ने पूरा किया. सरकार ने विभिन्न बोर्ड, निगम और परिषदों में नियुक्तियों की सूची जारी कर दी है. जिसमें पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं को दायित्वों की सौगात मिली. आपको बता दे,धामी सरकार में अब तक करीब 80 के आसपास नेताओं को विभिन्न आयोगों, बोर्डों और परिषदों में जिम्मेदारियां दी जा चुकी है. देहरादून उत्तराखंड में नेताओं को जमकर दायित्व बांटे जा रहे हैं. इस बार भी करीब 15 से 20 नेताओं को विभिन्न आयोग, बोर्ड और परिषद में उपाध्यक्ष या सदस्य के रूप में नामित किया गया है. राज्य सरकार द्वारा किए गए इन दायित्व बंटवारे के बाद कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां मिली हैं, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से राज्य के विकास कार्यों को और सशक्त किया जाएगा और सभी नियुक्त पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में योगदान देकर सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे। सरकार की इस घोषणा के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक नई नियुक्तियों से उत्साहित नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह दायित्व बंटवारा सरकार की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके। तो वही विपक्षी दल बाटे गए दायित्वों को लेकर धामी सरकार पर कम समय और जनता के पैसे का दुरुपयोग बता रही है.
-उत्तराखंड में एक बार फिर सरकार द्वारा नेताओं और कार्यकर्ताओं को दायित्व देने का सिलसिला तेज हो गया है. हाल के दिनों में शासन की ओर से जारी आदेशों से साफ संकेत मिल रहे हैं, कि सरकार विभिन्न आयोगों, बोर्डों और सलाहकार परिषदों में बड़ी संख्या में राजनीतिक नियुक्तियां कर रही है. इस बार करीब 15 से 20 नेताओं को अलग-अलग संस्थाओं में उपाध्यक्ष या सदस्य के रूप में जिम्मेदारियां सौंपी गई है. साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया की आगे भी और दायित्व बंटवारे को लेकर नई सूची निकल सकती है वहीं कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर तंज कस्ते हुए कहा की उनको उम्मीद है इस बार दायित्व भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं को ही मिले होंगे नहीं तो सरकार कांग्रेस से गए लोगो को ही महत्व दे रही है.
गौरतलब है कि लंबे समय से कई नेता दायित्व मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे. अब सरकार द्वारा नियुक्त किए गए पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में कार्यभार संभाल कर सरकार की योजनाओं को लागू करने में जुट जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नए नियुक्त पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को किस प्रकार निभाते हैं और राज्य के विकास में किस तरह योगदान देते हैं।वही विपक्षी दलों का मानना है की चुनाव आने से पहले कम समय के लिए बाटे गए ये दायित्व सिर्फ भाजपा का चुनावी एजेंडा है. ताकि अपनो को खुश किया जाये और जनता के पैसे की बर्बादी। वही दायित्व बंटवारे को लेकर अब आरोप प्रत्यारोप के तीर तेजी से चलने शुरू हो गए है.
उत्तराखंड की राजनीति में दायित्वों का विषय नया नहीं है. राज्य गठन के बाद पहली निर्वाचित सरकार के दौरान भी इस तरह की नियुक्तियां काफी चर्चा में रही थीं. उस समय नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली सरकार पर यह आरोप लगा था कि बड़ी संख्या में राजनीतिक दायित्व बांटे गए.उस दौर में यह कहा गया था कि तिवारी सरकार ने 200 से अधिक नेताओं को विभिन्न पदों पर दायित्व दिया था.हालांकि बाद के सालों में सरकारें बड़े पैमाने पर दायित्व बांटने से बचती रही हैं. इसके पीछे कई कारण बताए जाते रहे हैं, जिनमें राजनीतिक आलोचना और वित्तीय भार जैसे मुद्दे भी शामिल रहे हैं. अब एक बार फिर उत्तराखंड में दायित्वों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में कितने नेताओं को दायित्व दिए गए हैं, हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर है कि पिछले चार वर्षों में यह संख्या लगातार बढ़ती रही है.अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक करीब 80 के आसपास नेताओं को विभिन्न आयोगों, बोर्डों और परिषदों में जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं.माना जा रहा है कि आने वाले समय में दायित्वों की सूची और लंबी हो सकती है.