डिजिटल डेस्क- देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 7 से 9 अप्रैल 2026 के बीच एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ देश के बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। इसके असर से उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक कई राज्यों में तेज आंधी, गरज-चमक, भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार पश्चिमी विक्षोभ असामान्य रूप से सक्रिय है और यह भारत के लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित कर सकता है। खास बात यह है कि उत्तर-पश्चिम भारत में एक के बाद एक दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं, जिनका सबसे ज्यादा असर 7 और 8 अप्रैल को देखने को मिलेगा। इस दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश और कई इलाकों में ओले गिरने की आशंका है।
7 अप्रैल को मध्यम तो 8-9 को हो सकती है भारी बारिश और ओलावृष्टि
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, कश्मीर घाटी में 7 अप्रैल को मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली NCR, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 7 से 9 अप्रैल के बीच भारी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार और झारखंड में 6 से 8 अप्रैल तक छिटपुट ओले गिर सकते हैं, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 8 अप्रैल को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत भी इस सिस्टम से अछूता नहीं रहेगा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 7 और 8 अप्रैल को ओले गिर सकते हैं, जबकि 8 और 9 अप्रैल को यहां हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में 9 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है।
अगले सात दिनों तक तापमान में दिखेगी कमी
राजधानी दिल्ली में 6 अप्रैल को मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने की संभावना है, जहां अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। लेकिन 7 और 8 अप्रैल को मौसम करवट लेगा और आंशिक बादल छाने के साथ गरज-चमक और बारिश हो सकती है। इस मौसम बदलाव का असर तापमान पर भी पड़ेगा। अगले 7 दिनों तक देश के ज्यादातर हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। हालांकि, यह राहत किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रबी सीजन की खड़ी फसलें जैसे गेहूं और सरसों इस समय सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। भारी बारिश और ओलावृष्टि से इन फसलों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है, खासकर बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में।