KNEWS DESK- हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जो विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित होता है। वैशाख माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को “विकट संकष्टी चतुर्थी” कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और कथा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
व्रत कथा का महत्व: क्यों पढ़ी जाती है कथा
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह कथा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि हमें जीवन में धैर्य, विश्वास और भक्ति का महत्व भी सिखाती है। कहा जाता है कि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
प्राचीन समय में धर्मकेतु नाम के एक विद्वान ब्राह्मण रहते थे। उनकी दो पत्नियां थीं—सुशीला और चंचला। सुशीला अत्यंत धार्मिक और श्रद्धालु थी, जबकि चंचला का झुकाव धर्म-कर्म की ओर नहीं था।
समय के साथ सुशीला को एक पुत्री हुई और चंचला को पुत्र प्राप्त हुआ। इस बात को लेकर चंचला ने सुशीला का उपहास किया और उसकी भक्ति पर सवाल उठाए। हालांकि, इन कटु बातों के बावजूद सुशीला ने अपनी श्रद्धा नहीं छोड़ी और निरंतर व्रत करती रही।
सुशीला ने पूर्ण श्रद्धा के साथ विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उसे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ समय बाद उसकी यह इच्छा भी पूरी हुई।
हालांकि, उसके जीवन में कठिनाइयां तब आईं जब उसके पति का निधन हो गया। इसके बावजूद सुशीला ने धैर्य और विश्वास के साथ अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। उसका पुत्र बड़ा होकर गुणवान और बुद्धिमान बना, जिससे घर में सुख-समृद्धि आने लगी।
सुशीला के परिवार की खुशहाली देखकर चंचला के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हुई। एक दिन उसने अवसर पाकर सुशीला के पुत्र को कुएं में धकेल दिया। लेकिन भगवान गणेश की कृपा से बालक सुरक्षित बच गया।
इस घटना के बाद चंचला को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सुशीला से क्षमा मांगी। सुशीला ने उदारता दिखाते हुए उसे माफ कर दिया और विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने की सलाह दी।
चंचला ने सुशीला की बात मानकर व्रत किया और धीरे-धीरे उसके जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आने लगे। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयां दूर हो जाती हैं।
भक्ति, क्षमा और विश्वास का संदेश
विकट संकष्टी चतुर्थी की यह व्रत कथा हमें सिखाती है कि ईर्ष्या और अहंकार से दूर रहकर भक्ति और प्रेम का मार्ग अपनाना चाहिए। भगवान गणेश अपने भक्तों की हर बाधा को दूर करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।