UP ATS का बड़ा खुलासा, दुबई से आकिब चला रहा था आतंकी मॉड्यूल, राजधानी में धमाके की साजिश नाकाम

KNEWS DESK- देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए संभावित हमले को टाल दिया है। उत्तर प्रदेश एटीएस की कार्रवाई में कई संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इस मॉड्यूल को विदेश से संचालित किया जा रहा था और इसके तार सोशल मीडिया के जरिए अंतरराष्ट्रीय हैंडलर्स से जुड़े हुए थे।

एटीएस के अनुसार, मेरठ का रहने वाला आकिब, जो लंबे समय से दुबई में रह रहा है, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है। वह कथित तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए भारत में सक्रिय युवकों को जोड़कर उन्हें विदेशी हैंडलर्स से संपर्क करा रहा था। इसी कड़ी में उसने साकिब नाम के आरोपी को भी जोड़ा, जो आगे सीधे संपर्क में आकर संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था।

हाल ही में एटीएस ने मेरठ के साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, गौतमबुद्धनगर के विकास उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला पंडित को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये सभी लखनऊ रेलवे स्टेशन को निशाना बनाने की साजिश के तहत वहां पहुंचे थे। समय रहते इनकी गिरफ्तारी से एक बड़ा हादसा टल गया।

एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार, आकिब इस नेटवर्क में नई भर्ती और मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रहा था। उसके विदेशी संपर्कों के जरिए यह नेटवर्क विस्तार ले रहा था। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग हैं और देश के किन-किन हिस्सों में ऐसे मॉड्यूल सक्रिय हो सकते हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि आकिब ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर हथियारों के साथ तस्वीरें साझा की थीं, जिनमें एके-47 जैसे घातक हथियार भी शामिल हैं। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर जांच एजेंसियों को सुराग मिला और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से एटीएस को पांच दिन की कस्टडी रिमांड मिली है। अब एजेंसियां उनसे गहन पूछताछ कर रही हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल है और किन-किन स्थानों को निशाना बनाने की योजना थी।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बार फिर बड़ा खतरा टल गया है, लेकिन यह मामला इस बात की भी चेतावनी देता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर आतंकी नेटवर्क किस तरह अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहे हैं।

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