आम आदमी पार्टी का बड़ा फैसला, राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को दी नई जिम्मेदारी

डिजिटल डेस्क- आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका देते हुए उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है। पार्टी ने उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया है। इस संबंध में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक पत्र भी सौंप दिया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने सिर्फ पद से हटाने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि राज्यसभा में राघव चड्ढा के बोलने के समय को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। जानकारी सामने आई है कि पार्टी ने सचिवालय को यह भी सूचित किया है कि उन्हें सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

इस समय सक्रिय ते राघव, लोकजन से जुड़े मुद्दे लगातार उठा रहे थे

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राघव चड्ढा लगातार राज्यसभा में सक्रिय थे और जनहित से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे थे। उन्होंने महंगाई, एयरपोर्ट पर महंगी चाय, और डिलीवरी बॉयज जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा था। इसके बावजूद पार्टी के भीतर उनके कामकाज को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा था। सूत्रों की मानें तो पार्टी नेतृत्व ने राघव चड्ढा को पहले भी कई बार चेतावनी दी थी। आरोप है कि वह कई मुद्दों पर बिना पार्टी से चर्चा किए ही सदन में बोलते थे और यह भी जानकारी नहीं देते थे कि वे किस विषय को उठाने वाले हैं। इससे पार्टी की रणनीति और समन्वय प्रभावित हो रहा था।

इन कारणों को माना जा रहा वजह

इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा कई अहम मौकों पर पार्टी लाइन से हटकर या चुप्पी साधकर नजर आए। जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को अदालत से राहत मिली थी, तब भी उनकी ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इस बात को भी पार्टी के भीतर गंभीरता से लिया गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एक और वजह यह भी रही कि राघव चड्ढा राज्यसभा में पार्टी कोटे से तय समय का बड़ा हिस्सा खुद ही इस्तेमाल कर लेते थे, जिससे अन्य सांसदों को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता था। इसके अलावा, उन पर यह आरोप भी लगा कि वे कई बार पार्टी के आधिकारिक रुख को मजबूती से पेश नहीं कर पाते थे। हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन अंदरूनी सूत्र इसे अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण से जोड़कर देख रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *