KNEWS DESK – कथावाचक Aniruddhacharya द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को Delhi High Court में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने जहां कड़ी टिप्पणियां कीं, वहीं अनिरुद्धाचार्य को अंतरिम राहत भी प्रदान की।
अदालत ने उठाए अधिकार क्षेत्र पर सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस Tushar Rao Gedela ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि जब अनिरुद्धाचार्य वृंदावन में रहते हैं, तो उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख क्यों किया। अदालत ने यह भी कहा कि जब देशभर में विभिन्न उच्च न्यायालय और जिला अदालतें मौजूद हैं, तो इस मामले को विशेष रूप से दिल्ली में लाने का क्या औचित्य है।
‘आलोचना से ऊपर होना चाहिए’
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि एक धार्मिक गुरु होने के नाते उन्हें आलोचना और प्रशंसा से ऊपर होना चाहिए। जस्टिस गेडेला ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी विचारधारा का प्रचार करता है, तो असहमति भी स्वाभाविक है और हर व्यक्ति को विरोध का अधिकार है।
वकील ने छवि खराब होने का दिया तर्क
अनिरुद्धाचार्य की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि वायरल वीडियो और क्लिप्स उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और इससे उनके अनुयायियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि यदि किसी अनुयायी का विश्वास ऐसे कारणों से डगमगाता है, तो यह उस व्यक्ति की आस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
डीपफेक का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ वीडियो डीपफेक तकनीक के जरिए बनाए गए हैं, जिनमें उन्हें ऐसी बातें कहते हुए दिखाया जा रहा है जो उन्होंने कभी कही ही नहीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य के ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। साथ ही, अदालत ने संबंधित प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि शिकायत में शामिल वीडियो और लिंक हटाए जाएं।