KNEWS DESK- अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। देशभर में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार, सभी 50 राज्यों में 3,200 से ज्यादा रैलियां और प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, जिन्हें अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा एकदिवसीय शांतिपूर्ण आंदोलन बताया जा रहा है।
“No Kings protest” के तहत हो रहे इन प्रदर्शनों में लाखों लोगों की भागीदारी की उम्मीद है। इससे पहले भी इस अभियान के दो बड़े आयोजनों में भारी भीड़ जुट चुकी है। इस बार खास बात यह है कि विरोध सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और समुदायों में भी तेजी से फैल रहा है।
New York City, Los Angeles और Washington, D.C. जैसे बड़े शहरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। वहीं National Mall में जुटी भीड़ ने लोकतंत्र के समर्थन में नारे लगाए और ट्रंप प्रशासन के खिलाफ पोस्टर लहराए।
इसी तरह Chevy Chase में एक सहायक आवास केंद्र के बाहर बुजुर्गों ने भी विरोध दर्ज कराया। व्हीलचेयर पर बैठे लोगों ने “तानाशाही का विरोध करें” और “अगर लोकतंत्र चाहते हैं तो हॉर्न बजाएं” जैसे संदेशों के जरिए अपनी आवाज बुलंद की।
Austin में प्रदर्शनकारियों का उत्साह अलग ही अंदाज में देखने को मिला, जहां एक ब्रास बैंड की धुनों के बीच लोग सिटी हॉल तक मार्च के लिए इकट्ठा हुए।
इस आंदोलन की प्रमुख आयोजक संस्था Indivisible की सह-संस्थापक Leah Greenberg ने कहा कि इस बार आंदोलन की ताकत सिर्फ भीड़ में नहीं, बल्कि इसके फैलाव में है। उनका कहना है कि छोटे शहरों और पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन राज्यों में बढ़ती भागीदारी इस अभियान को और प्रभावी बना रही है।
आगामी मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने Idaho, Wyoming, Montana और Utah जैसे राज्यों में भी सक्रियता बढ़ाई है, जहां पहले इस तरह के विरोध कम देखने को मिलते थे।
हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Abigail Jackson ने इन प्रदर्शनों को खारिज करते हुए इन्हें “ट्रंप डेरेंजमेंट थेरेपी सेशंस” करार दिया और कहा कि इनमें आम जनता से ज्यादा मीडिया की रुचि है।
फिर भी, सड़कों पर उमड़ती भीड़ और देशभर में फैलते विरोध से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अमेरिका में राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है।