KNEWS DESK- चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला राम नवमी का पावन पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में इसी दिन भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अपना सातवां अवतार लिया था। अयोध्या के राजा दशरथ की रानी कौशल्या के गर्भ से दोपहर के समय श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
राम नवमी के दिन भक्तजन विधि-विधान से भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान राम प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन के सभी दुख दूर करते हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
इस वर्ष राम नवमी का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। मध्याह्न पूजा का विशेष समय दोपहर 12 बजकर 27 मिनट माना गया है, जो भगवान राम के जन्म का समय माना जाता है। इस दौरान पूजा करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। साथ ही, आज पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जो पूजा और व्रत के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पूजा विधि की बात करें तो, इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद एक साफ चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर राम दरबार की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। फिर विधिपूर्वक भगवान की पूजा करें। श्रीराम को पीला चंदन, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। तुलसी दल के साथ खीर और बेर का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है।
इसके अलावा, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत भगवान को अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इस दिन रामचरितमानस का पाठ और श्रीराम के मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित करें।इस प्रकार श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।