राज्यसभा में जया बच्चन का तीखा तेवर, ट्रांसजेंडर बिल पर सरकार को घेरा, सदन में हुई नोकझोंक

डिजिटल डेस्क- राज्यसभा में बुधवार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने खुद को विपक्ष के सभी वक्ताओं के साथ जोड़ते हुए रामनवमी की शुभकामनाएं दीं, लेकिन जैसे ही वह आगे बोलने लगीं, सदन में शोर-शराबे के चलते उनका भाषण बीच-बीच में बाधित होता रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान डिप्टी चेयरमैन पैनल में शामिल दिनेश शर्मा ने जया बच्चन से अपनी ओर देखकर बोलने के लिए कहा। इस पर जया बच्चन ने कहा कि जब कोई और बोल रहा होता है तो ध्यान वहीं चला जाता है, और जब वह बोलेंगी तो ध्यान उनकी ओर होना चाहिए। इस दौरान सदन में कई बार व्यवधान की स्थिति बनी रही, जिस पर चेयर की ओर से सदस्यों को शांत रहने की अपील की गई।

समय आपके हाथ में है… जितना चाहे दीजिए…

स्थिति उस समय और रोचक हो गई जब जया बच्चन ने कहा, “बच्चे, बैठ जाओ,” जिस पर चेयर की ओर से टिप्पणी आई कि उनका समय व्यर्थ हो रहा है। इस पर उन्होंने जवाब दिया, “कोई बात नहीं सर, समय आपके हाथ में है, जितना चाहें दीजिए, फांसी चढ़ा दीजिए।” उन्होंने आगे कहा कि कमजोर लोगों को लगातार दबाया जा रहा है। जया बच्चन ने ट्रेजरी बेंच की ओर इशारा करते हुए चेयर से कहा कि उन्हें टोका जा रहा है, जबकि अन्य सदस्यों को नहीं रोका जा रहा। इस पर चेयर ने स्पष्ट किया कि सभी को बीच में न बोलने की हिदायत दी गई है। हालांकि, जया बच्चन ने यह भी कहा कि अगर सदस्य चेयर की बात नहीं मानते, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्रांसजेंडरों के सम्मान और ऐतिहासिक महत्व को उठाया प्रमुखता से

अपने भाषण के दौरान जया बच्चन ने ट्रांसजेंडर समुदाय के सम्मान और उनके ऐतिहासिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में इस समुदाय को हमेशा सम्मान दिया गया है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी उपस्थिति को शुभ माना जाता है। उन्होंने भगवान राम के संदर्भ में कहा कि इस समुदाय को आशीर्वाद प्राप्त है और हर शुभ अवसर पर उनकी उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने आगे कहा कि पुराने समय में राजाओं के महलों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए रखा जाता था और उनकी उपस्थिति से सुरक्षा की भावना जुड़ी होती थी। ऐसे में यह समझ से परे है कि आज सरकार उनकी मौजूदगी से असुरक्षित क्यों महसूस कर रही है।

सरकार पर लगाए कई आरोप

सपा सांसद ने सरकार पर आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दों के बजाय बजट जैसे अहम विषयों पर अधिक चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इस विधेयक को लाने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस समुदाय को संसद में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए और उन्हें नामित सदस्य बनाया जाना चाहिए, ताकि उनकी समस्याओं और अनुभवों को सीधे सुना जा सके। जया बच्चन ने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधन में ‘सेल्फ डिक्लेरेशन’ के प्रावधान को समाप्त किया जा रहा है, जो उनके अनुसार संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के संदर्भ में कहा कि पहले अधिक विधेयकों को समीक्षा के लिए भेजा जाता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में कमी आई है।

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