डिजिटल डेस्क- गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने के बाद राज्य की राजनीति और देशभर में एक नई बहस छिड़ गई है। करीब 7 घंटे तक चली मैराथन चर्चा और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच यह बिल ध्वनि मत से पास कर दिया गया। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को विधानसभा में इस विधेयक को पेश किया। उन्होंने इसे राज्य में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा और धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ की व्यवस्था को खत्म कर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करेगा।
क्या हैं बिल के बड़े प्रावधान?
इस यूसीसी कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को एक समान नियमों के तहत लाया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि अब शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। विवाह के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना या 3 महीने तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, जबरदस्ती, दबाव या धोखाधड़ी से कराई गई शादी को अपराध माना गया है, जिसमें दोषी को 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। बहुविवाह पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है और इसे भी दंडनीय अपराध बनाया गया है। सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी की निजी स्वतंत्रता छीनना नहीं, बल्कि महिलाओं खासतौर पर बेटियों को कानूनी सुरक्षा देना है।
राज्य से बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू
“गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026” नाम से प्रस्तावित यह कानून सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और कुछ पारंपरिक समुदायों को इससे बाहर रखा गया है, जिनके अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित हैं।
विपक्ष का तीखा विरोध
जहां सत्तारूढ़ बीजेपी इसे “ऐतिहासिक सुधार” बता रही है, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका जोरदार विरोध किया है। कांग्रेस विधायक शैलेश परमार और अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार ने आगामी चुनावों को देखते हुए जल्दबाजी में यह बिल पास कराया है और इसे स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए था। कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप बताया। उनका कहना है कि निकाह और उत्तराधिकार से जुड़े नियम शरीयत और कुरान के अनुसार चलते हैं, और इस कानून से उन पर असर पड़ेगा। उन्होंने इस बिल के खिलाफ आंदोलन और कोर्ट जाने की भी बात कही है।