KNEWS DESK – मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी और इज़रायली हमलों के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर तबाही की खबरें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सैन्य अधिकारी, सरकारी पदाधिकारी और आम नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं ईरान की जवाबी कार्रवाई में इज़रायल में भी कई लोगों की जान गई है और कुछ अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
इस बढ़ते युद्ध को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और बड़ा संकट मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष भारत के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि भारत की बड़ी तेल सप्लाई इसी क्षेत्र से होकर आती है।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत के तेल आयात का करीब 40% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर वहां हालात और बिगड़ते हैं तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
दरअसल ईरान-अमेरिका-इज़रायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव बढ़ गया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगर कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे हालात में वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसका एक महत्वपूर्ण भाग इसी मार्ग से आता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत के पास फिलहाल करीब 25 दिनों का कच्चे और परिष्कृत तेल का भंडार मौजूद है। लेकिन अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं, तो भविष्य में तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।