KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश के मथुरा, वाराणसी, अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में होली की मस्ती अपने चरम पर है। शहर और गांव दोनों जगहों पर रंगों, ढोल-नगाड़ों और गीतों के साथ होली का उत्सव मनाया जा रहा है। हर तरफ उल्लास और उमंग का माहौल देखा जा रहा है, लोग अबीर-गुलाल के रंग में सराबोर होकर त्योहार का आनंद ले रहे हैं।
वाराणसी में बुधवार को रंगभरी एकादशी के मौके पर होली का उत्सव विशेष रूप से भव्य रहा। सुबह से ही श्रद्धालु श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचकर बाबा के साथ होली खेल रहे थे। मंदिर परिसर में टेसू (पलाश) के फूलों से बने रंगों का प्रयोग किया गया और भजन-कीर्तन तथा होली गीतों के साथ त्योहार की रौनक बढ़ाई गई।
युवाओं की टोलीयों ने पारंपरिक होली बरात भी निकाली। भगवान शिव के स्वरूप में कुछ लोग घोड़े पर सवार होकर अड़भंगी रूपों में नजर आए। बरात में भांग, ठंडई और अबीर-गुलाल का इस्तेमाल कर पूरे नगर को रंगीन कर दिया गया। काशी की इस होली ने स्थानीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया।
शाहजहांपुर में बुधवार को होली के रंग और उल्लास के बीच छोटे और बड़े लाट साहब की परंपरागत सवारी निकाली गई। सुबह नौ बजे शुरू हुई इस सवारी में बड़े लाट साहब पैदल कूंचालाला से लाए गए। चौकसीनाथ मंदिर में माथा टेकने के बाद उन्हें भैंसागाड़ी पर सवार कराया गया।
भैंसागाड़ी की सुरक्षा अर्द्धसैनिक बल ने सुनिश्चित की। सवारी के दौरान लाट साहब का स्वागत जूते-चप्पल और झाड़ू से किया गया। रंग-गुलाल की फुहारों और उत्सव के बीच लाट साहब की सवारी चौक कोतवाली पहुंची, जहां उन्हें परंपरागत तरीके से सलामी और नजराना दिया गया।
उत्तर प्रदेश की होली केवल रंगों और मस्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए भजन-कीर्तन और लोकधुनों ने त्योहार को आध्यात्मिक रंग भी दिया। शहरों और गांवों के लोग अपने अंदाज में होली मना रहे हैं और पूरे प्रदेश में उल्लास का वातावरण है।
उत्तर प्रदेश की होली इस बात का संदेश देती है कि भले ही समय बदलता रहे, लेकिन परंपराओं और लोकसंस्कृति की मिठास हमेशा जीवित रहती है।