शिव शंकर सविता- बिहार के मुंगेर से सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रेलवे में टेक्नीशियन बनने की चाह में दो युवकों ने ऐसा जाल बिछाया कि करीब एक साल तक सिस्टम को गुमराह करते रहे। लेकिन आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक के आगे उनकी चालाकी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी और दोनों आखिरकार जेल पहुंच गए। कहानी 2024 की रेलवे भर्ती से शुरू होती है। मुंगेर के मुकेश कुमार ने टेक्नीशियन पद के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे अपनी सफलता को लेकर संदेह था। ऐसे में उसने अपने पड़ोसी और कोचिंग संचालक रंजीत कुमार से संपर्क किया। दोनों के बीच 6 लाख रुपये में सौदा तय हुआ रंजीत, मुकेश की जगह परीक्षा देगा।
गूगल और एडिटिंग से तैयार की ‘हाइब्रिड फोटो’
फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए दोनों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया। गूगल और एडिटिंग टूल्स की मदद से मुकेश और रंजीत के चेहरों को मिलाकर एक ‘हाइब्रिड फोटो’ तैयार की गई, जो दोनों से मिलती-जुलती लगे। योजना यह थी कि अगर भविष्य में फोटो पर सवाल उठे तो उम्र के साथ चेहरे में बदलाव का बहाना बनाया जाएगा। इसी फोटो के आधार पर रंजीत ने पटना में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) दी और बाद में भोपाल में मेडिकल टेस्ट भी पास कर लिया। दस्तावेजों में सब कुछ सामान्य दिख रहा था और सिस्टम को कोई शक नहीं हुआ।
चयन, ड्यूटी और ट्रेनिंग तक पहुंचा मामला
जुलाई 2025 में मुकेश का चयन हो गया। उसने दमोह, सागर और जबलपुर जैसे रेल मंडलों में ड्यूटी भी की। अक्टूबर 2025 में उसे ट्रेनिंग के लिए प्रयागराज भेजा गया। दोनों को लगा कि उनकी योजना पूरी तरह सफल हो चुकी है। लेकिन उन्हें रेलवे के एक अहम नियम की जानकारी नहीं थी नए कर्मचारियों का एक साल के भीतर रैंडम बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है।
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में खुली सच्चाई
14 नवंबर 2025 को जब मुकेश का अंगूठा और चेहरे का स्कैन किया गया, तो डेटा भर्ती के समय दर्ज बायोमेट्रिक से मेल नहीं खाया। दरअसल, भर्ती के समय दर्ज बायोमेट्रिक रंजीत का था। जैसे ही गड़बड़ी सामने आई, मुकेश मौके से फरार होकर बिहार भाग गया। मामला गंभीर होने पर Central Bureau of Investigation (CBI) की जबलपुर टीम को जांच सौंपी गई। टीम ने मुंगेर में छापेमारी कर मुकेश को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर रंजीत कुमार को भी दबोच लिया गया। अब जांच इस दिशा में बढ़ रही है कि क्या रंजीत ने पहले भी अन्य अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देकर उन्हें नौकरी दिलाई है।