KNEWS DESK- कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत की चुप्पी की कड़ी आलोचना की।
The Indian Express में प्रकाशित एक ओपिनियन लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि इस घटना पर भारत की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया न आना केवल तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचना है। उन्होंने लिखा कि किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार को दर्शाती है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक नई दिल्ली की चुप्पी है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने शुरुआती अमेरिकी-इजरायली हमलों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी और केवल ईरान की जवाबी कार्रवाई की आलोचना तक खुद को सीमित रखा। उनके मुताबिक, बाद में प्रधानमंत्री ने ‘गहरी चिंता’ और ‘संवाद व कूटनीति’ की सामान्य बात कही, जबकि हमलों से पहले भी बातचीत की प्रक्रिया जारी थी।
उन्होंने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत की ओर से संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट बचाव नहीं किया जाता, तो इससे देश की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
सोनिया गांधी ने इस घटनाक्रम से ठीक पहले प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हत्या से लगभग 48 घंटे पहले पीएम मोदी इजरायल की यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति समर्थन दोहराया था।
उन्होंने दावा किया कि ऐसे समय में जब गाजा संघर्ष को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता और आक्रोश है, भारत का “बिना नैतिक स्पष्टता के हाई-प्रोफाइल राजनीतिक समर्थन” चिंताजनक संकेत देता है।
सोनिया गांधी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के कई देशों के साथ-साथ भारत के साझेदार जैसे रूस और चीन ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया है। ऐसे में भारत की स्थिति एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है।
उन्होंने संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की, ताकि सरकार अपनी विदेश नीति और हालिया घटनाक्रम पर देश के सामने स्पष्ट रुख रख सके।