शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के कानपुर में चर्चित लैंबॉर्गिनी कार मामले में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। दो हफ्ते पहले वीआईपी रोड पर हुए एक्सीडेंट के बाद जब्त की गई महंगी स्पोर्ट्स कार को अब कड़ी शर्तों के साथ रिलीज करने का आदेश दे दिया गया है। हालांकि, जिस तरह इस पूरे प्रकरण में अब तक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले, उसी तरह गाड़ी की रिलीज की प्रक्रिया भी उतार-चढ़ाव से भरी रही। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब कानपुर के व्यस्त वीआईपी रोड पर एक तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार से बाइक सवार को टक्कर लग गई थी। हादसे में बाइक सवार को मामूली चोटें आई थीं। बताया गया कि उस वक्त कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के पुत्र शिवम मिश्रा चला रहे थे। घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, मामला जमानती धाराओं में दर्ज होने के कारण अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया और कार्रवाई को लेकर पुलिस को फटकार भी लगाई थी।
सुनवाई में दिखा नाटकीय मोड़
शुक्रवार को बचाव पक्ष की ओर से लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज कराने के लिए सुनवाई निर्धारित थी। लेकिन अप्रत्याशित रूप से एसीजेएम-7 की कोर्ट ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद केस को अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में भेजा गया, जहां से भी सुनवाई करने से मना कर दिया गया। इससे पूरे मामले में एक बार फिर कानूनी पेच फंसता नजर आया। आखिरकार प्रशासनिक आदेश के तहत यह मामला सीजेएम सूरज मिश्रा की अदालत में स्थानांतरित किया गया। सीजेएम ने पूरे घटनाक्रम और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करते हुए लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज करने का आदेश दे दिया।
8 करोड़ 30 लाख रुपये का बॉन्ड
अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहन को रिलीज करने के लिए 8 करोड़ 30 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड जमा करना होगा। यह राशि कार की अनुमानित कीमत के आधार पर तय की गई बताई जा रही है। इतनी बड़ी रकम के बॉन्ड ने भी इस मामले को चर्चा का विषय बना दिया है।
कोर्ट की सख्त शर्तें
सिर्फ बॉन्ड ही नहीं, अदालत ने कार मालिक पर कई कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। आदेश के अनुसार:
- वाहन को न तो बेचा जा सकेगा और न ही किसी अन्य के नाम ट्रांसफर किया जा सकेगा।
- कार के रंग, स्वरूप या किसी भी तकनीकी बदलाव की अनुमति नहीं होगी।
- न्यायालय या विवेचक द्वारा तलब किए जाने पर वाहन को स्वयं के खर्च पर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
- किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में राज्य सरकार के पक्ष में 8.30 करोड़ रुपये की बॉन्ड राशि जब्त की जाएगी।