KNEWS DESK- हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हर महीने दो एकादशियाँ आती हैं, लेकिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली विजया एकादशी को विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को जीवन के हर संघर्ष में विजय प्राप्त होती है और शत्रुओं पर भी जीत मिलती है।
विजया एकादशी 2026: शुभ तिथि और मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026 (रात से)
- एकादशी तिथि समापन: 13 फरवरी 2026 (शाम तक)
- उदयातिथि के अनुसार व्रत: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
- पारण (व्रत खोलना): 14 फरवरी 2026, सुबह 07:05 से 09:20 के बीच
विजया एकादशी की पूजा विधि
- स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर शुद्ध स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- वेदी सजाएं: एक वेदी बनाकर उस पर सात तरह के अनाज रखें।
- कलश प्रतिष्ठा: सोने, चांदी या तांबे के कलश को स्थापित करें और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- भोग अर्पित करें: भगवान विष्णु को फल, फूल, धूप-दीप अर्पित करें तथा तुलसी दल अवश्य समर्पित करें।
- मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- व्रत कथा: विजया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- व्रत खोलना: अगले दिन यानी द्वादशी को ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन तथा सामर्थ्य अनुसार दान देकर अपना व्रत खोलें।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- चावल का त्याग: एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना वर्जित माना जाता है।
- सात्विकता: पूरे दिन सात्विक आहार लें और किसी के प्रति द्वेष न रखें।
- तुलसी दल का महत्व: पूजा के दौरान तुलसी का पत्ता भगवान विष्णु को भोग स्वरूप देना आवश्यक है; इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंका विजय से पूर्व विजया एकादशी का व्रत किया था। यह व्रत विशेष शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करने वाला माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार:
- पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत रखने से मानसिक शांति मिलती है।
- जीवन में आने वाली बाधाओं और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।
- यदि कोई व्यक्ति कानूनी विवाद, करियर में रुकावट या मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो यह व्रत उसके लिए अत्यंत फलदायी सिद्ध हो सकता है।नतीजा
विजया एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह श्रद्धालु के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आशीर्वाद का मार्ग भी खोलती है। सही विधि और श्रद्धा के साथ व्रत एवं पूजा करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है। अगर आप चाहें तो मैं विजया एकादशी की कथा भी साझा कर सकती हूँ। बताएं!