उन्नाव केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा सस्पेंड करने से किया इनकार

KNEWS DESK- दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सेंगर की 10 साल की सजा सस्पेंड करने की याचिका खारिज कर दी है और साफ कर दिया है कि उन्हें इस मामले में कोई राहत नहीं मिलेगी।

इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर भले ही अपनी 10 साल की सजा में से करीब 7.5 साल जेल में बिता चुके हों, लेकिन उनकी अपील पर फैसला लेने में जो देरी हुई है, उसकी जिम्मेदारी कुछ हद तक खुद सेंगर की भी है। कोर्ट ने बताया कि सेंगर की ओर से बार-बार अलग-अलग अर्जियां दाखिल की गईं, जिससे सुनवाई लंबित होती रही। इसी आधार पर कोर्ट ने बेल और सजा सस्पेंड करने की मांग ठुकरा दी।

क्या है पूरा मामला?

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता को कुलदीप सिंह सेंगर के कहने पर गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में उनके साथ बर्बरता हुई, जिसके चलते उनकी कस्टडी में मौत हो गई। इस मामले ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था। मार्च 2020 में दिल्ली की एक अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य आरोपियों को पीड़िता के पिता की मौत का दोषी ठहराया था और उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

पहले भी मिल चुकी है अदालत से फटकार

यह पहली बार नहीं है जब सेंगर को कोर्ट से झटका लगा हो। इससे पहले जून 2024 में भी दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा सस्पेंड करने की अर्जी खारिज कर दी थी। तब कोर्ट ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, जुर्म का स्वरूप, दोषी का आपराधिक रिकॉर्ड और न्यायपालिका पर जनता के भरोसे पर पड़ने वाला असर इन सभी पहलुओं को देखते हुए कुलदीप सिंह सेंगर किसी भी तरह की राहत के हकदार नहीं हैं।

क्या है कोर्ट का संदेश?

हाई कोर्ट के इस फैसले को न्यायिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि गंभीर अपराधों में दोषी नेताओं को केवल सजा का बड़ा हिस्सा काट लेने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती, खासकर जब मामला कानून, पुलिस बर्बरता और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *